सीएम सम्राट चौधरी ने प्रशांत किशोर को दी बधाई, भाजपा ने स्वीकारा जनादेश, रोहिणी आचार्या ने भी दीं शुभकामनाएं
पटना, 3 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर की जीत के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। सीएम सम्राट चौधरी और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए चुनाव परिणाम पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। इधर, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी समीक्षा की बात कही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि लोकतंत्र के महापर्व में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने जन सुराज को चुना है। उन्होंने कहा कि वह जनता के इस निर्णय का सम्मान करते हैं और जन सुराज के संस्थापक एवं उम्मीदवार प्रशांत किशोर को उनकी जीत पर हार्दिक बधाई देते हैं।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा बांकीपुर उपचुनाव के जनादेश को सिर झुकाकर स्वीकार करती है और जनता के फैसले का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस बात की गंभीर समीक्षा करेगी कि उसे अपेक्षित समर्थन क्यों नहीं मिला और कमियों को दूर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।
संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा अपनी हार का ठीकरा कभी भी संवैधानिक संस्थाओं, ईवीएम या चुनाव आयोग पर नहीं फोड़ती। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्थाओं में पूर्ण विश्वास रखती है तथा आत्ममंथन और समीक्षा के जरिए अपनी कमजोरियों को सुधारने की परंपरा का पालन करती है।
उधर, राजद नेता रोहिणी आचार्या ने भी 'एक्स' पर प्रशांत किशोर को बधाई देते हुए लिखा कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जीत उसी की होती है जो लगातार संघर्ष करता है, जनता से निरंतर जुड़ा रहता है तथा अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सम्मान करते हुए उनके साथ संवाद बनाए रखता है।
रोहिणी आचार्या ने इसे भाजपा के विरोध और लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत बताया। उन्होंने प्रशांत किशोर को जीत की बधाई देते हुए उनके जन-समर्पित कार्यकाल और भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम के बाद विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आई इन प्रतिक्रियाओं को बिहार की राजनीति में बदलते राजनीतिक संदेश और जनादेश की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।
--आईएएनएस
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