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राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर CJI सूर्यकांत सख्त! बोले- अदालत को डराने की कोशिश बेकार, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश

 

सुप्रीम कोर्ट में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध और विपक्षी नेताओं के मार्च से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता।

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि वह याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में सवाल करना चाहता है और संबंधित व्यक्ति को इस पर सफाई देनी होगी। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और 13 अन्य लोगों की याचिका का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कोर्ट के बाहर हुई घटना पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं का मुद्दा भी सामने आया। वकील गौरव भाटिया ने अदालत से CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया था।इस पर जस्टिस बागची ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने निजी पक्षों को भी संबंधित फुटेज या अन्य सामग्री रिकॉर्ड पर दाखिल करने की अनुमति दी।इस आदेश का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की जांच के लिए जरूरी सबूतों को सुरक्षित रखना है।

प्रदर्शन बुलाने वालों की जिम्मेदारी तय करने की मांग

सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका पर भी विचार किया गया, जिसमें मांग की गई है कि प्रदर्शन का आह्वान करने वाले लोगों की जिम्मेदारी तय की जाए।

याचिका में कहा गया है कि यदि किसी प्रदर्शन के कारण दूसरे लोगों को परेशानी होती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो प्रदर्शन बुलाने वालों की जवाबदेही पर भी विचार किया जाना चाहिए।

CJI सूर्यकांत ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया। अब संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना जवाब रखना होगा।

आखिर राहुल गांधी और विपक्षी सांसद सुप्रीम कोर्ट तक मार्च क्यों निकालने पहुंचे?

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब विपक्षी सांसदों ने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर उनसे मिलने और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर को भेजे गए इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया।

इसके बाद 12 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। बाद में विपक्षी सांसदों के सुप्रीम कोर्ट परिसर तक पहुंचने का मामला भी चर्चा में आया।

विपक्षी नेताओं का विरोध SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए जाने चाहिए और उनकी शिकायतों पर सुनवाई होनी चाहिए।

चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर क्यों है? जानिए 4 प्रमुख वजहें

1. SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल

विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।

2. मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का विवाद

रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई है।

3. फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर आपत्ति

फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, SIR से जुड़ा सवाल इस फॉर्म में जोड़ने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई गई थी। इस मामले में नियमों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।

4. चुनावी डेटा और काम के बंटवारे पर चिंता

चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच तथा अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मुद्दों पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे जाने और कुछ आदेशों की वैधता पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई है।

इन मुद्दों पर सामने आई रिपोर्टों और राजनीतिक आरोपों के बीच चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर बहस तेज हुई है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षों से जवाब मांगा है और CCTV सहित डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत में अब यह देखना अहम होगा कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं, संबंधित याचिकाओं और प्रदर्शन आयोजित करने वालों की जवाबदेही पर क्या तथ्य सामने आते हैं।

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अदालत अपने कामकाज पर किसी तरह के दबाव या धमकी को स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों के आचरण और घटनाओं की जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष सुनवाई और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निकलेगा।