चुनाव में हार के बावजूद सीपीआई(एम) का इतिहास रहा शानदार: एमए बेबी
तिरुवनंतपुरम, 13 सितंबर (आईएएनएस)। सीपीआई(एम) के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि पिछले चुनाव में हार के बावजूद पार्टी का इतिहास शानदार रहा है। उन्होंने गलतियों को पहचानने, आत्म-आलोचना करने और लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें सुधारने की जरूरत पर जोर दिया।
सीपीआई(एम) की राज्य समिति की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए एमए बेबी ने कवि कदममनिट्टा रामकृष्णन का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को याद रखना चाहिए कि वह आज जिस मुकाम पर है, वहां तक कैसे पहुंची और समझना चाहिए कि कहां गलती हुई।
बेबी ने कहा, "सीपीआई(एम) के खिलाफ ऐसा अभियान चलाया जा रहा है जैसे पार्टी का कोई इतिहास ही न हो।" उन्होंने माना कि पार्टी गलतियों से अछूती नहीं रही है और कहा कि जरूरत इस बात की है कि गलतियों को खुलकर माना जाए और उन्हें सुधारने के लिए कदम उठाए जाएं।
ईएमएस नंबूदरीपाद की वैचारिक सोच का जिक्र करते हुए बेबी ने कहा कि पार्टी को अपनी चुनावी हार के कारणों की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि कहां गलती हुई।
उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) ने पिछले चुनाव में अपनी हार के कारणों की पहचान कर ली है। पार्टी को यह भी देखना चाहिए कि क्या वह अपने खिलाफ रची जा रही 'झूठी कहानियों' के असर को समय रहते नहीं पहचान पाई।
बेबी ने ऐसी कहानियों की तुलना 1959 के 'मुक्ति संघर्ष' से की। उन्होंने इसे केरल के इतिहास में झूठी कहानी का सबसे बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि ऐसी कहानी आज भी जारी है।
उन्होंने कहा कि एक पारदर्शी कम्युनिस्ट आंदोलन आलोचना को स्वीकार करेगा, अपनी गलतियां सुधारेगा और मजबूत होकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सिर्फ वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार की कमियों की वजह से सत्ता में वापस नहीं आएगा, बल्कि लेफ्ट अपनी ताकत के दम पर सत्ता में लौटेगा।
बेबी ने कम्युनिस्ट आंदोलन के खिलाफ होने वाली आलोचनाओं को चार श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो जमीनी स्तर पर कम्युनिस्ट आंदोलन के मजबूत न होने पर परेशान हो जाते हैं। दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं, जो गलत धारणाएं बनने से चिंतित होते हैं, जबकि तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं, जो ऐसी गलत धारणाएं बनाते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने कहा कि चौथी श्रेणी में पार्टी के भीतर के ही आलोचक शामिल हैं।
बेबी ने कहा, "आत्म-आलोचना जरूरी है। हमें यह देखना होगा कि क्या हमारा जीवन कम्युनिस्ट जीवन-शैली के अनुरूप है या नहीं।" उन्होंने जोर दिया कि पार्टी कमेटियों के भीतर स्वतंत्र और निडर आलोचना होनी चाहिए और पार्टी सदस्यों से आग्रह किया कि जरूरत पड़ने पर वे मजबूती से जवाब दें।
बेबी ने कहा कि सार्वजनिक आलोचना संघ परिवार के दखल से जुड़े मुद्दों तक ही सीमित होनी चाहिए, जबकि संगठन के अंदरूनी मुद्दों पर पार्टी के भीतर ही चर्चा और आलोचनात्मक समीक्षा होनी चाहिए।
--आईएएनएस
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