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राहुल गांधी सड़क पर भीड़ जुटाकर न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश क्यों कर रहे: प्रदीप भंडारी

 

नई दिल्‍ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मीडिया सह-संयोजक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया और राजघाट पर राहुल गांधी तथा कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भंडारी ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में सब-ज्यूडिस है, फिर राहुल गांधी सड़कों पर भीड़ जुटाकर न्यायपालिका और संस्थाओं पर दबाव बनाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं।

भाजपा के मीडिया सह-संयोजक ने पूछा कि क्या कांग्रेस को न्यायालय पर विश्वास नहीं है या उसका पक्ष तथ्यों के आधार पर कमजोर है। प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा युवक के साथ दुर्व्यवहार की आलोचना की और राहुल गांधी से लोकतांत्रिक मर्यादा अपनाने तथा अराजकता के लिए देश से माफी मांगने की मांग की।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि इस वक्त आप राहुल गांधी और विपक्ष को राजघाट में देख रहे हैं। देश के लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति पिछले तीन दिनों से राहुल गांधी की अराजकता और गुंडागर्दी से परेशान हो चुका है। इस वक्त विपक्ष के साथी राजघाट गए हैं। अगर बापू जिंदा होते तो कम से कम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को सद्बुद्धि देते। हम उम्मीद करते हैं कि राजघाट गई कांग्रेस पार्टी को कम से कम सद्बुद्धि आए। पिछले तीन दिनों से लोकतंत्र को अराजकता की तरफ धकेलने की कांग्रेस पार्टी की जो साजिश इस देश का व्यक्ति देख रहा है, उसे वह बेनकाब कर रहा है। आज अगर कांग्रेस पार्टी राजघाट गई है, तो कम से कम उसे लोकतंत्र के प्रति सद्बुद्धि मिलनी चाहिए।

भाजपा नेता कहा कि हम सब जानते हैं कि चुनाव आयोग से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट के अंदर सब-ज्यूडिस है, तो हम राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछना चाहते हैं। लोकतंत्र की बुनियाद देश के न्यायालय में विश्वास रखने की होती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुन रहा है, तो राहुल गांधी सड़क पर अराजक धरने के बहाने क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना अविश्वास दिखा रहे हैं? या राहुल गांधी को यह डर है कि जो केस सुप्रीम कोर्ट के अंदर गया है, वह तथ्यों के आधार पर इतना वीक है कि राहुल गांधी को एक माहौल बनाने का प्रयास करना पड़ रहा है? क्या राहुल गांधी सड़कों पर अराजकता फैलाकर संवैधानिक तंत्र और भारतीय लोकतंत्र को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं?? क्योंकि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के अंदर है, तो सड़क पर भीड़ को मोबिलाइज करने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं करती है। सुप्रीम कोर्ट फैसला तथ्यों के आधार पर करती है।

भंडारी ने कहा कि आज राहुल गांधी राजघाट गए हैं। राजघाट में अगर उन्हें लोकतंत्र की सद्बुद्धि मिल जाए, तो हमारे कुछ सवाल हैं, जिनका उन्हें जवाब देना चाहिए। जब मामला सुप्रीम कोर्ट के अंदर सब-ज्यूडिस है, तो क्या रील मेकर राहुल गांधी का कोर्ट में विश्वास नहीं है? क्या उनका केस इतना कमजोर है या वह कोर्ट के प्रति अविश्वास और दबाव की राजनीति सड़कों से करना चाह रहे हैं? इसीलिए पिछले तीन दिन से कांग्रेस के कार्यकर्ता, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, गुंडागर्दी, अराजकता धरने की आड़ में करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या ये कोर्ट से इसीलिए घबराए हैं क्योंकि जब-जब कांग्रेस पार्टी का मामला कोर्ट के अंदर गया है, कांग्रेस पार्टी के तथ्य हमेशा कमजोर हुए हैं? यह ईवीएम की बात करते थे। जब मामला ईवीएम का कोर्ट में गया, तो कहा गया कि, "अगर आप जीतते हैं, तो ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं होती, जब आप हारते हैं, तो उनमें पूरी तरह से छेड़छाड़ हो जाती है।" तो कोर्ट ने इनके झूठ को एक्सपोज किया।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के खिलाफ यह अविश्वास का प्रस्ताव लेकर आए थे, जो खारिज हो गया। कांग्रेस का संवैधानिक तंत्र को डराने या डराने की कोशिश करने का इतिहास रहा है। हम सीधे सवाल पूछना चाहते हैं। बंगाल में 1977 से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं है। बिहार में 1990 से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं है। उड़ीसा में 2000 से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं है। आंध्र प्रदेश में 2014 से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं है। उत्तर प्रदेश में 1989 से कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं है। इस समय कौन वोट चोरी कर रहा था? कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी। क्या कांग्रेस पार्टी खुद केंद्र की सरकार के जरिए राज्यों के अंदर वोट चोरी कर रही थी? सच्चाई की बात यह है कि कांग्रेस जनता में अविश्वास खो चुकी है। देश के लोगों ने कांग्रेस पार्टी की अराजकता पर भरोसा करना छोड़ दिया है। इसीलिए इनका नया मॉडल आ गया है। हजार-डेढ़ हजार लोगों को दिल्ली की सड़कों पर गैदर करो, धरना करो और धरने के बहाने इस देश के लोकतंत्र को हाइजैक करने का प्रयास करो।

भाजपा के मीडिया सह-संयोजक ने कहा कि जो-जो महात्मा गांधी जी में विश्वास रखता है, जो इस देश के लोकतंत्र में विश्वास रखता है, उसको राहुल गांधी से यह सवाल पूछना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के मामले का फैसला क्या सड़क से हो सकता है? जब सब जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मामले का फैसला सड़क से नहीं हो सकता, तो क्या यह अपराध नहीं है, जो राहुल गांधी सड़क पर भीड़ को मोबिलाइज करके अपनी व्हिम्स और फैन्सीज के हिसाब से कहीं किसी जगह घुस जाते हैं और कहीं भी धरने पर बैठ जाते हैं? यह एक ऐसी चीज है, जो अलोकतांत्रिक है। जो राहुल गांधी कर रहे हैं, वह अलोकतांत्रिक है। इसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को देना चाहिए। वे अपराध की बात करते हैं। असली अपराध तो इस देश के सुप्रीम कोर्ट में भरोसा न होना है। कितनी भी भीड़ राहुल गांधी मोबिलाइज कर दें, फैसला तो कोर्ट से होगा क्योंकि मामला सब-ज्यूडिस है। जब कोर्ट दूसरी तारीख दे चुका है, तो इसका उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य सिर्फ यही है कि राहुल गांधी अराजकता की टूलकिट के आधार पर इस देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं पर प्रेशर बनाने का प्रयास कर रहे हैं और कह रहे हैं कि " माय वे-ऑर-द हाईवे"।

भंडारी ने कहा कि हम राहुल गांधी से कहना चाहते हैं कि यह परिवार का राज नहीं है, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का संविधान है। संविधान यह कहता है कि जब मामला कोर्ट में होता है, तो सड़कों की भीड़ के आधार पर फैसला नहीं होता, बल्कि तथ्यों के आधार पर होता है। क्या आपके केस में इतनी कमजोरी है कि आपको लग रहा है कि कोर्ट के अंदर आपका पक्ष कमजोर है, इसीलिए आप बाहर से दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं? सवाल नंबर एक। हमने देखा कि इस देश के एक युवक ने सच्चाई बोलने और अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने का प्रयास किया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उसे घेरकर पीटने का प्रयास किया। आज कांग्रेस पार्टी "वी द पीपल ऑफ इंडिया" को थ्रेटन कर रही है। संविधान के पहले शब्द हैं - "वी द पीपल ऑफ इंडिया"। जब एक युवक ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारे लगाए, तो उसे पीटा गया। यह अपराध है। इसके लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब देना चाहिए। आज भारत की, खासकर दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जो गुंडागर्दी देख रहे हैं, वह एक बात स्पष्ट करती है कि कांग्रेस पार्टी को "वी द पीपल ऑफ इंडिया" में विश्वास नहीं है। यह लड़ाई कांग्रेस पार्टी, उसके कार्यकर्ताओं और परिवार बनाम "वी द पीपल ऑफ इंडिया" हो चुकी है। और "वी द पीपल ऑफ इंडिया" साइलेंटली कांग्रेस पार्टी की गुंडागर्दी को देख रहे हैं।

प्रदीप भंडारी ने कहा कि ये बैलेट की बात कर रहे थे। अभी हमने देखा कि असम, त्रिपुरा और अलग-अलग जगहों पर चुनाव हुए। हर जगह, जहां ईवीएम से चुनाव नहीं हुआ, वहां भी कांग्रेस पार्टी चुनाव हारी है। सच्चाई यह है कि राहुल गांधी जान चुके हैं कि जनता में उनका अविश्वास है और जनता का उनमें विश्वास नहीं है। इसीलिए लोकतांत्रिक रूप से जब राहुल गांधी सत्ता में नहीं आ पा रहे हैं, तो वह लोकतंत्र पर प्रहार कर रहे हैं। राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं और भारत के सुप्रीम कोर्ट में विश्वास न करके इस देश में लोकतांत्रिक कमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या राहुल गांधी और गांधी-वाड्रा परिवार इस देश के न्यायालय से ऊपर हैं? यह सवाल हम इस देश की जनता से पूछना चाहते हैं। राहुल गांधी की गुंडागर्दी यही स्पष्ट करती है कि वह अपने आप को इस देश के सुप्रीम कोर्ट से ऊपर समझते हैं। जो परिवार अपने आप को इस देश के सुप्रीम कोर्ट से ऊपर समझता है, उस परिवार का विश्वास लोकतंत्र में नहीं हो सकता। इसलिए अगर भारत के लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा है, तो वह राहुल गांधी की मनमानी अराजकता से, कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की मनमानी गुंडागर्दी से और लोकतांत्रिक संस्थाओं के ऊपर बिना तथ्यों के गांधी-वाड्रा परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से है।

भाजपा के मीडिया सह-संयोजक ने कहा कि रील मेकिंग कॉम्पिटिशन ही इस देश के लोकतंत्र की सच्चाई नहीं है। राहुल गांधी को अगर रील बनाना है, तो हम कहना चाहते हैं कि आप रील मेकर बन जाइए और रील बनाइए, यह आपका अधिकार है। लेकिन आप इस देश के लोकतंत्र को सड़क के आधार पर, स्ट्रीट अनार्की के आधार पर हाइजैक नहीं कर सकते। हम उम्मीद करते हैं कि राजघाट में गांधी-वाड्रा परिवार गया है। बापू ने कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी को खत्म कर देना चाहिए। शायद बापू ने आगे 100 साल देख लिया था कि कांग्रेस का क्या हश्र होगा और कैसे यह अराजकता का समर्थन करेंगे। इसीलिए बापू ने वह एनविजन किया होगा। लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि जब राजघाट जाएं, तो बापू इन्हें कुछ सद्बुद्धि दें, जिससे ये अराजकता नहीं, लोकतंत्र को अपनाएं। तीन दिन जितनी मेहनत राहुल गांधी ने रील बनाने में की है, अगर उतनी ही मेहनत वह जनता के बीच में और अपने कार्यकर्ताओं के बीच कर लेते, तो कांग्रेस का कुछ वोट बढ़ जाता। लेकिन इन परिवारवादियों को इससे मतलब ही नहीं है। हम रील मेकर राहुल गांधी से तीन सवाल पूछना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि उन्हें राजघाट पर सद्बुद्धि मिले और वह इन सवालों के जवाब दें।

पहला सवाल - मामला सब-ज्यूडिस है। क्या भीड़ और भीड़ की अराजकता के जरिए राहुल गांधी इस देश के सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना अविश्वास जता रहे हैं?

दूसरा सवाल - क्या राहुल गांधी इस देश के कोर्ट्स को इंटिमिडेट करने का प्रयास कर रहे हैं?

तीसरा सवाल - क्या राहुल गांधी को लगता है कि उनका केस सुप्रीम कोर्ट में इतना कमजोर है, इसीलिए इस तरीके की माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

भंडारी ने कहा कि हम उम्मीद और प्रार्थना करते हैं कि बापू राहुल गांधी को सद्बुद्धि दें, जिससे उनका अराजक व्यवहार खत्म हो और वह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें। आज देश की जनता राहुल गांधी के खिलाफ खड़ी है और यह लड़ाई लोकतंत्र, "वी द पीपल ऑफ इंडिया" बनाम गांधी-वाड्रा परिवार हो चुकी है। लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा गांधी-वाड्रा परिवार की अराजकता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को किसी और को समझाने की जरूरत नहीं है, वह केवल राहुल गांधी को समझाएं। सबसे बड़ा अपराध राहुल गांधी ने किया है। उम्मीद है कि जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राहुल गांधी के सामने रहें, तो उनके अंदर सद्बुद्धि आए और वह कुबुद्धि को त्यागें। हम भी उम्मीद करते हैं कि राजघाट के बाद उनमें सद्बुद्धि आएगी और वह पिछले तीन दिनों की अराजकता के लिए देश की जनता से माफी मांगेंगे।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी