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चुनाव आयोग की स्‍पष्‍टता से एसआईआर पर फैलाए जा रहे भ्रम की सच्चाई सामने आई: संतोष सुमन

 

पटना, 26 सितंबर (आईएएनएस)। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि चुनाव आयोग की आज की स्पष्टता के बाद एसआईआर को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है।

उन्‍होंने कहा कि आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आयोग का संस्थागत निर्णय है और तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में आंतरिक विचार-विमर्श या सुझावों को अंतिम निर्णय से जोड़कर संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

सुमन ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और एसआईआर के लिए अलग अनुबंध- डी की व्यवस्था की गई थी। आयोग ने आगे बैठकों के एजेंडे पहले साझा करने और कार्यवाही के मिनट्स जारी करने की व्यवस्था की बात भी कही है। यह पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने वाला कदम है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है, क्योंकि पात्र मतदाता का नाम सुरक्षित रखना जितना जरूरी है, उतना ही अपात्र और फर्जी नामों की पहचान करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को राजनीतिक भ्रम पैदा करने के बजाय चुनाव आयोग की स्पष्टताओं और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुचिता पर सभी दलों को जिम्मेदारी के साथ सहयोग करना चाहिए।

दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शनिवार को चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को खारिज करने की कोशिश की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नई दिल्ली में निर्वाचन सदन में आयोग की पूर्ण बैठक की।

तीनों आयुक्तों की तस्वीर के साथ जारी एक विस्तृत प्रेस नोट में, ईसी ने अपने आंतरिक कामकाज, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर), मतदाता पंजीकरण और अपने तकनीकी सिस्टम से जुड़े आरोपों पर बात की।

यह बयान उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें कहा गया था कि संधू और जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। इन खबरों से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें विपक्षी दलों ने आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए और अधिक पारदर्शिता की मांग की।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी