☰
×

महात्मा गांधी के पड़पोते ने चुनाव आयोग की नीयत पर उठाए सवाल, बोले-मताधिकार छीनना गंभीर अपराध के समान

 

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने चुनाव आयोग की नीयत और रवैये को लेकर सवाल खड़ा किया। दोष साबित होने पर उन्होंने आयोग को जवाबदेही के साथ दंड की भी अपील की।

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने कहा, "पिछले कुछ साल के घटनाक्रम को देखते हुए ये सभी आरोप स्वाभाविक लगते हैं, क्योंकि अगर आप घटनाओं के सिलसिले को देखें, हर किसी को यह महसूस होने लगा है कि चुनावों में कुछ गड़बड़ी हो रही है। वोट डाले जाने के बाद और वोटों की गिनती से पहले, हर जगह गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। कई चुनावों में बहुत चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है।"

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सवालों का जवाब देने से बच रहा है। आयोग का यह अड़ियल रवैया ही कारण है कि जिन लोगों को नुकसान हो रहा है, वे उस पर आरोप लगा रहे हैं और यह आरोप लगाना स्वाभाविक है। अब तक आयोग ने जिस तरह से काम किया है, उससे उसकी नीयत पर शक करना जायज हो जाता है। एसआईआर को लेकर उन्होंने कहा कि जिस तरह नागरिकों से मताधिकार छीना जा रहा है, वह एक गंभीर अपराध के समान है।

ज्ञानेश कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर उन्होंने कहा कि एक के बाद एक राज्य में यह सामने आ रहा है कि भाजपा से जुड़े कुछ चुनिंदा लोग फॉर्म-7 भरकर नागरिकों को अपात्र ठहराने की मांग कर रहे हैं और इसी वजह से हजारों मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और नोटिस जारी करना पूरी तरह उचित है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग और सरकार दोनों को संविधान के अनुरूप काम करने की चेतावनी दी है, जो सराहनीय है।

चुनाव आयुक्त की त्रुटि पाए जाने की स्थिति को लेकर महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अब लोगों के मन में शंका पैदा हो गई है। अगर सुप्रीम कोर्ट की जांच में यह सामने आता है कि काम ठीक से नहीं हुआ है तो चुनाव आयोग को न सिर्फ जवाब देना चाहिए, बल्कि दंड भी भुगतना चाहिए। अब समय आ गया है कि चुनाव आयोग और पूरी चुनाव प्रक्रिया को नागरिकों के हवाले किया जाए और नागरिक सहभागिता से चुनाव कराए जाएं। नागरिक का अधिकार सिर्फ वोट देना नहीं है, बल्कि उसके मत का सही प्रभाव देखने का भी हक उसे है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया से सबको बाहर कर दिया है। मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी इस चयन पैनल में रहें, लेकिन उन्हें हटा दिया गया। अब पैनल में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विपक्ष के एक नेता को रखा गया है।

--आईएएनएस

केके/वीसी