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चीनी खतरे के बीच ताइवान का युद्धाभ्यास, बख्तरबंद वाहन से राष्ट्रपति को ले जाया गया कमांड सेंटर

 

ताइपे, 6 अगस्त (आईएएनएस)। चीन के साथ ताइवान के रिश्ते सामान्य नहीं है। हाल फिलहाल में खतरा और बढ़ा है। इस सबके बीच ताइवान ने अपने वार्षिक 'हान कुआंग' सैन्य अभ्यास के दौरान गुरुवार तड़के एक महत्वपूर्ण युद्धकालीन अभ्यास किया। इस दौरान राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को बख्तरबंद सैन्य वाहन में सुरक्षित रूप से एक गुप्त कमांड सेंटर तक पहुंचाया गया, जहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन संचालन और सरकारी कामकाज की समीक्षा की।

राष्ट्रपति लाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वो कमांड सेंटर पहुंचे और सालाना हान कुआंग ऑपरेशन को बारीकी से देखा। विभिन्न ड्रिल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने अंत में कहा हम शांति स्थापित करने के अपने इरादे पर अडिग हैं।

इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कुछ तस्वीरें जारी की गई थीं। जिसमें लाई बुलेटप्रूफ जैकेट और सैन्य हेलमेट पहने नजर आए। यह अभ्यास ऐसे परिदृश्य पर आधारित था, जिसमें युद्ध की स्थिति में शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर सरकार और सेना की कमान निर्बाध रूप से जारी रखी जाती है।

राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य कमांड संरचना, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की क्षमता का परीक्षण करना है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में सरकार प्रभावी ढंग से काम करती रहे।

ताइवान लंबे समय से आशंका जताता रहा है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में चीन शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की तथाकथित "डिकैपिटेशन स्ट्राइक" (नेतृत्व को निष्क्रिय करने वाला हमला) करने की की कोशिश कर सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के अभ्यास में नेतृत्व की सुरक्षित आवाजाही और वैकल्पिक कमांड व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है।

10 दिनों तक चलने वाले इस वर्ष के हान कुआंग अभ्यास में 20,000 से अधिक रिजर्व सैनिक भाग ले रहे हैं। इसमें युद्धकालीन संचार व्यवस्था, नागरिक प्रशासन, हथियारों के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने, साइबर व्यवधान और संभावित चीनी हमले जैसी परिस्थितियों का भी अभ्यास किया जा रहा है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात दोहराता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान की सरकार इन दावों को खारिज करते हुए कहती है कि द्वीप का भविष्य केवल वहां की जनता ही तय कर सकती है।

--आईएएनएस

केआर/