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चीन के पास ऐसा 'हथियार' जो बिना गोली चलाए अमेरिका को कर सकता है परेशान, ट्रंप के सामने बढ़ी बड़ी चुनौती

 

वॉशिंगटन/बीजिंग: दुनिया में चल रहे युद्धों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसा मुद्दा तेजी से अहम होता जा रहा है, जिसका संबंध सीधे हथियारों से नहीं, बल्कि उन खनिजों से है जिनके बिना आधुनिक हथियारों और तकनीक का निर्माण मुश्किल हो सकता है। ये हैं रेयर-अर्थ मिनरल्स। चीन इन खनिजों की माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट उत्पादन में बेहद मजबूत स्थिति में है। यही वजह है कि इसे अमेरिका के खिलाफ बीजिंग के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान रेयर-अर्थ सप्लाई भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक तरफ चीन पर व्यापार और तकनीकी दबाव बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी उद्योगों की उन सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की जरूरत है, जो चीन से आने वाले महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर हैं।

आखिर रेयर-अर्थ इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

रेयर-अर्थ तत्वों का इस्तेमाल स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, विमान और आधुनिक सैन्य प्रणालियों तक में होता है। खास तौर पर शक्तिशाली मैग्नेट इनका एक महत्वपूर्ण उपयोग हैं। इनका इस्तेमाल मिसाइल सिस्टम, विमान के विभिन्न उपकरणों, इलेक्ट्रिक मोटरों और दूसरी हाई-टेक प्रणालियों में किया जाता है।

चीन ने वर्षों के निवेश के जरिए इस पूरी सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति बनाई है। रिपोर्टों के मुताबिक चीन दुनिया की रेयर-अर्थ माइनिंग का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा और रिफाइनिंग क्षमता का 85 प्रतिशत से अधिक नियंत्रित करता है।

युद्ध बढ़े तो बढ़ सकती है मांग

अमेरिका के सामने चुनौती इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य संघर्ष जारी हैं। लंबे समय तक चलने वाले युद्धों में हथियारों, सैन्य वाहनों, विमानों और दूसरे रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ सकती है। इससे उन महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत भी बढ़ती है, जिनका इस्तेमाल इन प्रणालियों में होता है।

यही वह स्थिति है जहां चीन की सप्लाई चेन पर पकड़ अमेरिका के लिए रणनीतिक चिंता बन सकती है। यदि रेयर-अर्थ के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध या कड़े लाइसेंस नियम लागू होते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने में मुश्किल हो सकती है।

चीन ने पहले भी दिखाई है ताकत

रेयर-अर्थ को लेकर चीन और पश्चिम के बीच तनाव नया नहीं है। चीन पहले भी महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात नियंत्रण लागू कर चुका है। 2025 में रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई को लेकर पैदा हुए तनाव ने यह दिखाया था कि चीन की निर्यात नीति का असर वैश्विक कंपनियों पर पड़ सकता है।

इसी वजह से अमेरिका अब वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन चीन ने जिस स्तर की प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण क्षमता वर्षों में विकसित की है, उसे तुरंत बदलना आसान नहीं है।

ट्रंप के सामने संतुलन की चुनौती

रेयर-अर्थ का मुद्दा ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के हित यहां सीधे टकराते हैं। अमेरिका चीन पर तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में दबाव बनाए रखना चाहता है, जबकि बीजिंग के पास महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई के रूप में मजबूत आर्थिक और रणनीतिक leverage मौजूद है।

ऐसे में आने वाली बातचीत में व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और युद्धों के साथ रेयर-अर्थ मिनरल्स भी बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बने रह सकते हैं।

दरअसल, आधुनिक दौर में ताकत केवल मिसाइलों और सैन्य विमानों से तय नहीं होती। जिन देशों के पास तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई चेन पर नियंत्रण है, उनके पास भी बड़ा रणनीतिक प्रभाव हो सकता है। चीन की रेयर-अर्थ ताकत इसी बदलती वैश्विक रणनीति का एक अहम उदाहरण है।