छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार से की जवाबदेही तय करने की मांग
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के सांसदों ने केंद्र सरकार पर काम न करने का आरोप लगाया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रहे पेपर लीक और किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने इन सभी मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग की।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर और असंवेदनशील रवैया अपनाया। छात्रों के विरोध से निपटने का तरीका लोकतांत्रिक नहीं था। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रस्ताव दिया है। सरकार छात्रों और युवाओं के हितों की अनदेखी कर रही है और पूरे मामले की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की तुलना 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बैरिकेड्स, लाठीचार्ज और आंसू गैस का सामना करना पड़ा। लोकतंत्र में छात्रों को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाना उचित नहीं है।
परीक्षा प्रणाली और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश को एक पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की जरूरत है, लेकिन लगातार हो रही गड़बड़ियां इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। उन्होंने पूछा कि यदि परीक्षा में बार-बार अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि वंदे मातरम जैसे मुद्दे विवाद का विषय नहीं हैं, बल्कि देश के सामने असली चुनौती पेपर लीक, युवाओं का भविष्य और सार्वजनिक जवाबदेही है। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने केंद्र सरकार और पंजाब की भगवंत मान सरकार दोनों को घेरते हुए कहा कि किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले भी सैकड़ों किसान आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं और अब फिर से उन्हें रोकने की कोशिशें हो रही हैं। किसानों के साथ विश्वासघात हो रहा है।
कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने भी छात्रों के मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए संसद में इस पर चर्चा की मांग की। विवेक ने कहा कि छात्र किसी राजनीतिक दल के कहने पर नहीं, बल्कि अपने भविष्य की चिंता को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। संसद और उसके बाहर छात्रों तथा किसानों से जुड़े इन मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा।
--आईएएनएस
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