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मुरुगप्पा ने 1951 में लॉन्च की थी हरक्यूलिस साइकिल, अब इसी ग्रुप की सीजी सेमी साणंद में बना रही सेमीकंडक्टर चिप्स

 

गांधीनगर, 29 जुलाई (आईएएनएस)। आपने हरक्यूलिस साइकिल के बारे में तो सुना ही होगा। वर्ष 1949 में चेन्नई स्थित मरुगुप्पा ग्रुप ने यूके की ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स कंपनी के साथ साझेदारी में टीआई साइकिल्स ऑफ इंडिया की शुरुआत की थी। तत्कालीन भावनगर रियासत के अंतिम और अत्यंत लोकप्रिय प्रजावत्सल (प्रजा के सुख-दुख के साथी) शासक कृष्ण कुमार सिंह जी गोहिल ने मद्रास राज्य के गवर्नर के रूप में 1951 में इस कंपनी की टीआई साइकिल्स ‘ए’ फैक्ट्री का उद्घाटन किया था। इसी फैक्ट्री से हरक्यूलिस साइकिल का निर्माण शुरू हुआ, जो आगे चलकर देश का एक मशहूर ब्रांड बन गया।

इसी मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी सीजी सेमी अब भारत के सेमीकॉन मिशन को आगे ले जाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार है। 4 जुलाई, 2026 को साणंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कंपनी के व्यावसायिक उत्पादन का शुभारंभ किया।

सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी सीजी सेमी प्रा. लिमिटेड ने 7600 करोड़ रुपए के खर्च से साणंद में आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा शुरू की है। सीजी सेमी, भारत की सीजी पावर, जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स तथा थाइलैंड की स्टार माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स का संयुक्त उद्यम है, जिसमें सीजी सेमी की सबसे अधिक शेयर होल्डिंग है। जापान की कंपनी साणंद में निर्मित चिप्स खरीदने के साथ-साथ टेक्नोलॉजिकल सहयोग भी दे रही है। कंपनी अब बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन करके देश और दुनिया में चिप्स की आपूर्ति करेगी।

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को आगे ले जाने के लिए सीजी सेमी रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रही है। विशेषकर, महिला सशक्तिकरण के लिए कंपनी ने विशेष प्रयास किए हैं। सीजी सेमीकॉन के अधिकारियों के अनुसार ऐसी व्यवस्था की गई है कि फैक्ट्री फ्लोर पर प्लांट ऑपरेशन का ज्यादातर काम महिलाओं द्वारा किया जाए। अभी यहां देश के अलग-अलग राज्यों से आईं महिला कर्मचारी काम कर रही हैं। फ्लोर पर मशीन ऑपरेशन्स का ज्यादातर काम महिलाओं द्वारा किया जाएगा।

कंपनी ने गुजरात सहित देशभर से आकर साणंद में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को सेमीकंडक्टर प्लांट के कामकाज की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए तीन महीने के लिए मलेशिया भेजा। ये महिला कर्मचारी अब प्लांट में मशीनों का स्वतंत्र रूप से परिचालन करने के लिए तैयार हो गई हैं।

नवसारी की रहने वाली और अहमदाबाद के एलडी इंजीनियरिंग से वर्ष 2024 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन (ईसी) की पढ़ाई पूरी करने वाली श्रेया भरतभाई पटेल और सुरेंद्रनगर की जाह्नवी पाटड़िया इस प्लांट में प्रोसेस क्वालिटी इंजीनियर के रूप में काम करती हैं।

श्रेया के अनुसार, “पहले हम चिप का इस्तेमाल करते थे, इसलिए इसकी निर्माण प्रक्रिया में भी हमारी रुचि पैदा हो गई। इसलिए जब सेमीकंडक्टर उद्योग में काम करने का अवसर मिला, तो मैंने इसमें आगे बढ़ने का निर्णय किया। अभी हमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र के तकनीकी पहलुओं के बारे में सीखने में बहुत ही मजा आ रहा है।” प्रोसेस इंजीनियर के तौर पर श्रेया की जिम्मेदारी असेंबली में किसी भी प्रकार के डिफेक्ट का पता लगाना है।

जाह्नवी पाटड़िया को भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कुछ नया सीखने का उत्साह है। जाह्नवी कहती हैं, “हम जब ट्रेनिंग लेने के लिए मलेशिया गए, तब हमें वहां एक ऑपरेशनल कंपनी में काम करने का मौका मिला। लेकिन, यहां स्क्रैच से इस कंपनी का निर्माण हो रहा है, इसलिए कई चुनौतियां देखने को मिलती हैं और उनमें से नया सीखने को मिलता है।”

जाह्नवी के साथ केरल के वायनाड की रहने वाली वैष्णवी पाल भी प्रोसेस इंजीनियर की जिम्मेदारी संभालती हैं। केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने के बाद अभी वह सीजी सेमी के प्लांट में इलेक्ट्रोलाइट प्लेटिंग का काम संभालती हैं।

वैष्णवी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहती हैं, “मेरा केमिकल इंजीनियरिंग का बैकग्राउंड है, इसलिए शुरुआत में मुझे सेमीकंडक्टर के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। लेकिन, इस क्षेत्र में आने और ट्रेनिंग के बाद मेरे सारे संदेह दूर हो गए हैं। मुझे बहुत एक्सपोजर मिला है और अब मैं ज्यादा कॉन्फिडेंट हो गई हूं।”

केरल की रहने वाली सांड्रा ईके भी सीजी सेमी में बतौर प्रोसेस इंजीनियर काम करती हैं। सांड्रा कहती हैं, “जब मैं इंटर्नशिप में थी, तब मुझे इस अवसर के बारे में जानकारी मिली। पहले मुझे गुजरात के औद्योगिक विकास के बारे में ज्यादा पता नहीं था, लेकिन जब से मैं यहां आई और इंडस्ट्री को देखा, तब से मेरा सारा नजरिया बदल गया है।”

--आईएएनएस

डीकेपी/