केमिकल रंगों से त्वचा को हो सकती है एलर्जी-रैशेज, हर्बल रंगों से मनाएं सुरक्षित होली
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। होली का त्योहार रंगों की खुशी से भरा होता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर सिंथेटिक या केमिकल रंग त्वचा के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहे हैं। हर साल लाखों टन ऐसे रंग इस्तेमाल होते हैं, जिनमें लेड, मरकरी, क्रोमियम, सिलिका जैसे भारी धातु, इंडस्ट्रियल डाईज, माइका डस्ट और कभी-कभी इंजन ऑयल तक मिले होते हैं।
ये रसायन त्वचा को तुरंत और लंबे समय तक कई समस्याएं दे सकते हैं। केमिकल रंगों से त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा, सूजन, एक्जिमा जैसी एलर्जी, ड्राईनेस और दर्द तक हो सकता है। चेहरा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है क्योंकि रंग सीधे वहां लगते हैं।
यही नहीं पहले से मौजूद बीमारियों में बढ़ोतरी - एक्ने, एक्जिमा, सोरायसिस, विटिलिगो या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में स्थिति बिगड़ सकती है। लंबे समय के खतरे जैसे पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन (काले धब्बे), लेड जैसे टॉक्सिन बच्चों के लिए खासतौर पर हानिकारक हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए भी हानिकारक हैं। यही नहीं आंखों में जलन, रेडनेस, वॉटरिंग, ग्रिटिनेस, बालों का झड़ना, नाखूनों की समस्या भी आम बात है।
चेहरा सबसे नाजुक हिस्सा होने से इसका खास ख्याल रखना जरूरी है। होली से पहले और बाद में कुछ आसान उपाय अपनाने से कई लाभ मिलते हैं। प्री-होली प्रोटेक्शन के तहत चेहरे, गर्दन, हाथ-पैरों पर नारियल, बादाम, सरसों या तिल का तेल अच्छे से लगाएं। यह बैरियर बनाता है, रंग गहराई तक नहीं जाते। मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाएं। होंठों पर लिप बाम और नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश लगाएं। रंग खेलते समय सनग्लास पहनें ताकि आंखें सुरक्षित रहें।
वहीं, पोस्ट-होली केयर में ठंडे पानी से धोएं, हल्के क्लेंजर या ऑयल-बेस्ड क्लेंजिंग बाम से रंग हटाएं। चेहरे या त्वचा को रगड़ने से बचें, वरना स्क्रैच या एलर्जी बढ़ सकते हैं। मॉइस्चराइजर लगाकर त्वचा को हाइड्रेट रखें। अगर रैशेज या जलन हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
केमिकल रंगों के बजाय हर्बल या नेचुरल कलर्स अपनाना सबसे सुरक्षित है। ये पौधों, फूलों और रसोइघर की चीजों से बनते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद और पर्यावरण हितैषी होते हैं। कुछ आसान हर्बल रंग हैं, जिन्हें घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। ये रंग एलर्जी नहीं करते, आसानी से धुल जाते हैं और त्वचा को नरम रखते हैं।
हरे रंग के लिए पालक, धनिया, नीम की पत्तियां उबालकर या पीसकर बनाएं, पीला रंग हल्दी, बेसन या चावल का आटा और गेंदे की पंखुड़ियों से बनाएं। लाल या नारंगी रंग चुकंदर, गाजर, अनार के छिलका, लाल गुड़हल, पलाश या मेहंदी के पत्ते से बनाएं। नीले रंग के लिए नीले फूल या विष्णुकांता को उबालकर बनाएं। गुलाबी रंग के लिए गुलाब, चुकंदर या प्याज के छिलके का इस्तेमाल करें।
--आईएएनएस
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