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चीजों की बढ़ती कीमतें और ईरान से जुड़े संघर्ष ने रिपब्लिकन पार्टी को द‍िया बड़ा झटका: पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी

 

नई द‍िल्‍ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कारणों पर आईएएनएस के साथ चर्चा करते हुए पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी ने दो प्रमुख बातों का ज‍िक्र किया। उन्‍होंने कहा क‍ि इस हार का पार्टी की भविष्य की नीतियों और रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है।

आईएएनएस के साथ वार्ता करते हुए पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी ने कहा कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने न सिर्फ बड़ी संख्या में सीटें गंवाई हैं, बल्कि सीनेट, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और कई राज्यों में गवर्नर पदों पर भी अपना नियंत्रण खो दिया है।

कंसास जैसे राज्यों, जहां रिपब्लिकन पार्टी का दशकों से मजबूत दबदबा था, वहां भी तस्वीर बदल गई है। बताया जा रहा है कि लगभग 94 साल बाद वहां रिपब्लिकनों को बड़ा नुकसान हुआ है। माना जा रहा है कि इन नतीजों का पार्टी की भविष्य की नीतियों और रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है।

उन्‍होंने कहा कि चुनाव नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हार के लिए जिम्मेदार ठहराने की आवाजें उठने लगी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने देशभर में रैलियां कीं और लोगों से कहा था, 'ऐसे वोट करें जैसे मेरा नाम ही बैलेट पर हो।'

हालांकि, ट्रंप खुद चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने खुद को चुनाव अभियान से इतना जोड़ लिया था कि कई लोग उन्हें इन नतीजों का हिस्सा मान रहे हैं।

पूर्व राजनयिक ने कहा कि आमतौर पर मध्यावधि चुनावों में गवर्नर, प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है, लेकिन ट्रंप की सक्रिय मौजूदगी के कारण अब पार्टी के अंदर उनके नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग भविष्य में 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए जेडी वेंस जैसे नेताओं को आगे बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं। हालांकि, आगे क्या होगा यह काफी हद तक ट्रंप के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

उन्‍होंने कहा क‍ि विश्लेषकों का मानना है कि रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे दो बड़े कारण रहे हैं।

पहला कारण है अर्थव्यवस्था और डीजल, पेट्रोल तथा रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें। कई लोगों का मानना है कि ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) का बोझ आखिरकार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा, क्योंकि बढ़ी हुई लागत का भुगतान आम लोगों को करना पड़ा।

हाल ही में अदालतों की ओर से भी टैरिफ से जुड़े कुछ फैसले आए हैं, जिससे इस नीति पर बहस और तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि ट्रंप अपनी टैरिफ नीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।

दूसरा बड़ा मुद्दा ईरान से जुड़ा संघर्ष रहा है। ईरान के साथ तनाव बढ़ने, होर्मुज स्‍ट्रेट से जुड़े हालात और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसका असर अमेरिकी जनता पर भी पड़ा।

वीणा सीकरी ने कहा कि फिलहाल दो समानांतर घटनाएं चल रही हैं। एक तरफ कतर और तेहरान में शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा ईरान पर बड़े हमले की संभावित तैयारियों की भी चर्चा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल को पैट्रियट मिसाइलें भी भेजी गई हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ईरान को लेकर अपनी मौजूदा रणनीति जारी रखेंगे या कुछ समय के लिए रुककर अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठकर आगे की दिशा तय करेंगे। यह फैसला आने वाले दिनों में काफी अहम माना जा रहा है।

उन्‍होंने कहा क‍ि चुनाव नतीजों के बाद ट्रंप ने कहा कि वह डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने यह भी कहा है कि वह 'मिस्टर वीटो' बन सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डेमोक्रेट्स के प्रस्तावों को रोक सकते हैं। यही वजह है कि अब सबकी नजर इस बात पर है कि वह आगे कौन-सी नीति अपनाते हैं। क्या वह सहयोग का रास्ता चुनेंगे या टकराव का, यह आने वाले समय में साफ होगा।

उन्‍होंने कहा क‍ि नई चुनी गई कांग्रेस के सदस्य जनवरी में शपथ लेंगे। तब तक अमेरिकी राजनीति में क्या बदलाव होते हैं और ट्रंप किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी