चीन में पहली ट्रांस-हिमालयी सांस्कृतिक संगोष्ठी आयोजित
बीजिंग, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। चीन के थ्येनचिन शहर स्थित नानखाई विश्वविद्यालय में पहली ट्रांस-हिमालयी सांस्कृतिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। इसका आयोजन नानखाई विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र संकाय और सांस्कृतिक अध्ययन अनुसंधान संस्थान ने नेपाल के लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के ट्रांस-हिमालयी सांस्कृतिक अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर किया। संगोष्ठी को 'पोटाला' समग्र प्रसारण मंच और नेपाल साहित्य परिषद का भी समर्थन मिला।
इसमें पेइचिंग विश्वविद्यालय, चीनी रनमिन विश्वविद्यालय, पेइचिंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, नानखाई विश्वविद्यालय, चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी, चीन के राष्ट्रीय पुस्तकालय, चीन विदेशी भाषा प्रकाशन समूह, मकाऊ अंतर्राष्ट्रीय युवा थिंक टैंक, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय और भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय समेत कई विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 20 से अधिक विशेषज्ञों और विद्वानों ने हिस्सा लिया।
उद्घाटन सत्र में नानखाई विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र संकाय और सांस्कृतिक अध्ययन अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर कान छुनसोंग ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक बाधा नहीं है, बल्कि यह विभिन्न सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रांस-हिमालय सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े विद्वान दस्तावेजों पर आधारित शोध और क्षेत्रीय सर्वेक्षण की नवीनतम उपलब्धियों को साझा करेंगे। साथ ही, उन्होंने खुले और समावेशी माहौल में आपसी संवाद को बढ़ावा देने और अधिक युवा छात्रों को इस क्षेत्र के अध्ययन के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।
संगोष्ठी के दौरान 'हिमालय का भूगोल और मानविकी', 'ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध धर्म की विरासत और प्रसार', 'ट्रांस-हिमालयी बौद्ध दस्तावेज और विचार' तथा 'हिमालय पार सांस्कृतिक प्रसार और सभ्यताओं की कहानियां' जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें विद्वानों ने ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में पवित्र पर्वतों से जुड़ी आस्थाओं के ऐतिहासिक और धार्मिक पहलुओं के साथ-साथ इस क्षेत्र के धार्मिक ग्रंथों और विचारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
इसके अलावा, संगोष्ठी में शोध को व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ते हुए एआई जनित सामग्री (एआईजीसी) के दौर में विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद और प्रसार के तरीकों, क्षेत्रीय पारंपरिक चिकित्सा के विकास की मौजूदा स्थिति तथा उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग के नए मॉडलों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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