'चवन्नी' विवाद कांग्रेस ने दिया अखिलेश का साथ, जयंत चौधरी से कहा- 'असरवादिता आपका पीछा नहीं छोड़ेगी'
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के बीच राजनीति टकराव पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने समाजवादी पार्टी का बचाव करते हुए रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर सवाल उठाए और कहा कि आपकी अवसरवादिता आपका पीछा नहीं छोड़ेगी।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के चवन्नी वाले बयान पर कहा, "जिस तरीके से हल्के शब्दों का इस्तेमाल जयंत चौधरी ने अपने लिए किया, उसके बाद जयंत चौधरी किसी को कुछ नहीं कह सकते हैं। 'चवन्नी' उन्होंने अपने लिए कहा था, हम ने नहीं कहा उन्हें। उन्हीं के बयान को याद दिलाया गया, तो हल्के शब्दों का इस्तेमाल तो जयंत चौधरी ने किया। और आज की तारीख में जयंत चौधरी जी जाट समुदाय के पीछे, समाज के पीछे छुपना चाहते हैं। नहीं छुपने देंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारा जाट समुदाय बहुत स्वाभिमानी है। चौधरी चरण सिंह बहुत स्वाभिमानी थे। उनकी कौम बहुत स्वाभिमानी है। किसानों की कौम भी बहुत स्वाभिमानी है। जिन किसानों और जाटों को भाजपा ने धोखा दिया और उनके केंद्रीय आरक्षण में गद्दारी की, उनके साथ आप (जयंत चौधरी) बैठे हुए हैं। उन किसान हत्यारों के साथ आप बैठे हुए हैं, जिन्होंने आंदोलन के समय उनकी जानें लीं। इसलिए आपसे सवाल पूछे जाएंगे।"
सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि जयंत चौधरी सवालों से भागें नहीं। आपकी अवसरवादिता आपका पीछा नहीं छोड़ेगी।
वहीं, इस विवाद पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, "अखिलेश यादव का कहना है कि 'जयंत चौधरी सम्मान की बात कर रहे हैं। सम्मान तभी होगा, जब उन्हें चार गुना ज्यादा सीटें मिलेंगी।' इस लिहाज से रालोद को 120 सीटें मिलनी चाहिए।"
फखरुल हसन चांद ने कहा, "जितने भी दल पहले समाजवादी पार्टी के साथ थे, उन्हें चार गुना सीटें मिलनी चाहिए, ताकि ये दल चार गुना ताकत से लड़ सकें। ये दल कहते थे कि उनके कारण समाजवादी पार्टी की सीटें इतनी आईं। अब भाजपा की सीटों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। इसलिए अखिलेश यादव ने कहा था कि चार गुना सीटें रालोद को मिलनी चाहिए। इसका अर्थ भी राजनीति करने वाले सभी लोग समझते हैं।"
इससे पहले, अखिलेश यादव की 'चवन्नी' वाली टिप्पणी पर रालोद प्रमुख जयंती चौधरी ने अपने जवाब में कहा था, "सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते, कोई बात नहीं थी। जाट समाज को टारगेट करना और कहना एबीसीडी हमने सिखाई? मैं इस अहंकार को देख चुका हूं करीब से और मानता हूं ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है।"
जयंती चौधरी ने 'एक्स' पर एक अन्य पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय लोकदल की सीटों की फिक्र है, अपनी नहीं। गुलाब जामुन, रसगुल्ले के कीमत की चिंता है, गन्ना किसानों की नहीं। गाड़ी के माइलेज पर दुखी हैं, भारत की ऊर्जा स्वाधीनता की परवाह नहीं।"
--आईएएनएस
डीसीएच/