चैत्र नवरात्रि के पहले दिन अर्धचांद और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, अद्भुत शृंगार ने मोह लिया भक्तों का मन
उज्जैन,19 मार्च (आईएएनएस)। बारह ज्योतिर्लिंग में से सबसे प्रभावशाली और काल के देवता माने जाने वाले श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र नवरात्रि की धूम देखने को मिली।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया और माथे पर बड़े अर्धचांद और त्रिपुण को स्थापित कर महाकाल की पूजा-अर्चना की गई। बाबा के चैत्र नवरात्रि के पहले दिन के खास दर्शन देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ पहुंची।
बाबा महाकाल मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर नव संवत्सर का भव्य स्वागत किया गया। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष विधि-विधान के साथ पूजन किया गया। पहले ब्रह्म मुहूर्त में वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए और फिर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा को स्नान कर अभिषेक पूजन कराया और भस्म आरती की शुरुआत हुई।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, गुरुवार को बाबा के माथे पर त्रिपुंड बनाया गया और उसपर त्रिशूल को स्थापित किया गया। वहीं नीचे की तरफ भी एक त्रिपुंड बनाया गया और उसपर बाबा की तीसरी आंख को सुसज्जित किया गया। बाबा के माथे पर बड़ा अर्ध चांद भी बनाया गया जो तो सुख और शांति का प्रतीक है, और आखिर में सूखे मेवों की माला से बाबा को सजाया गया और लाल रंग की चुनरी बाबा को अर्पित की गई। बाबा के अद्भुत शृंगार को देख भक्त भी मंत्रमुग्ध नजर आए और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा।
बता दें कि भस्म आरती के दौरान बाबा भक्तों को निराकार रूप में दर्शन देते हैं, जो जीवन और मृत्यु से परे होता है। माना जाता है कि जो भी बाबा के निराकार रूप में दर्शन करता है, उसे और जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिलती है। वहीं शृंगार के बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं। साकार रूप बाबा का अलौकिक और संसार से जुड़ा होता है, जिसके दर्शन से भक्तों के सारे कष्ट कम हो जाते हैं।
--आईएएनएस
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