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चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन इन मंदिरों में करें मां स्कंदमाता की पूजा, मिलेगी कष्टों से मुक्ति

 

नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है, जिन्हें बुद्धि का विकास, सुख-शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की देवी के रूप में पूजा जाता है। देश के कई राज्यों में मां स्कंदमाता को समर्पित भव्य और प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनका ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व है। आज हम आपको देशभर के स्कंदमाता को समर्पित मंदिरों के बारे में बताएंगे।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जगतपुरा क्षेत्र मां स्कंदमाता को समर्पित है, जिसे बागेश्वरी देवी मंदिर के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर का जिक्र हमारे पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि मां ने इसी जगह पर राक्षस देवासुर का वध किया था और मां बागेश्वरी देवी के रूप में स्थापित हुई। नवरात्रि के पांचवे दिन मंदिर में भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मध्यप्रदेश के विदिशा में भी मां स्कंदमाता को समर्पित मंदिर है, जहां मात्र दर्शन के साथ ही भक्तों के सारे दुख खत्म हो जाते हैं। विदिशा में पुराने बस स्टैंड के पास सांकल कुआं के पास मां स्कंदमाता का मंदिर है, जहां नवरात्रि में विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर में नवरात्रि में झांकी सजाई जाती है। खास बात यह है कि मंदिर में स्कंद माता की अखंड ज्योत भी जलती रहती है।

गुजरात के वडोदरा शहर में मां स्कंदमाता का प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण 10वीं शताब्दी में किया गया था। यह मंदिर अपनी विशेष वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मां के दर्शन करने से मन को शांति और घर में खुशहाली आती है। नवरात्रि में मां का विशेष शृंगार भी किया जाता है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के चंबा में मां स्कंदमाता को समर्पित मंदिर है, जहां चैत्र नवरात्रि में विशेष भीड़ होती है। यह मंदिर लकड़ी की नक्काशी और मंदिर की संरचना के लिए भी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि मां के दर्शन के साथ सारी परेशानियों का अंत हो जाता है। तमिलनाडु राज्य में मदुरै में भी मां स्कंदमाता को समर्पित मंदिर मौजूद है। माना जाता है कि मंदिर 7वीं शताब्दी में बना था। माना जाता है कि अगर मां की विधिवत पूजा की जाए, तो भक्त हर मुश्किल से निजात पा सकते हैं।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी