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सीजीटीएन सर्वे : दक्षिण चीन सागर में शांति व स्थिरता बनाए रखने की पहल क्षेत्रीय देशों को अपने हाथों में रखनी चाहिए

 

बीजिंग, 23 जुलाई (आईएएनएस)। हाल ही में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने चीन-आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक में दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर चीन के सैद्धांतिक रुख को स्पष्ट किया।

वांग यी ने कहा कि चीन और आसियान देशों के पास दक्षिण चीन सागर मुद्दे को उचित तरीके से संभालने और शांति, स्थिरता, सहयोग और मित्रता को दक्षिण चीन सागर से संबंधित मुख्य विषय बनाने के लिए आवश्यक ज्ञान और क्षमता है।

यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि हालांकि दक्षिण चीन सागर का मुद्दा चीन और कुछ आसियान देशों के बीच क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री सीमांकन को लेकर विवादों से जुड़ा है। फिर भी चीन और सभी आसियान सदस्य देशों ने इस जलक्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की प्रबल इच्छा और संकल्प प्रदर्शित किया है। जुलाई 1992 में अपनाई गई दक्षिण चीन सागर पर आसियान घोषणा के आधार पर, सभी पक्षों ने दक्षिण पूर्व एशिया में मैत्री और सहयोग संधि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों और अन्य दस्तावेजों पर आधारित दक्षिण चीन सागर में विभिन्न पक्षों के आचरण पर घोषणापत्र (डीओसी) पर हस्ताक्षर किए।

इसके बाद, डीओसी का आकलन और कार्यान्वयन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें और संयुक्त कार्य समूह की बैठकें स्थापित की गईं, जिन्होंने दक्षिण चीन सागर में वर्तमान स्थिति को समग्र रूप से शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

चाइना मीडिया ग्रुप के सीजीटीएन द्वारा इस वर्ष जून और जुलाई के बीच छह देशों, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस और सिंगापुर, के 2,664 उत्तरदाताओं के बीच किए गए एक प्रश्नावली सर्वेक्षण से पता चलता है कि प्रमुख बाह्य शक्तियों का हस्तक्षेप दक्षिण चीन सागर में तनाव का एक प्रमुख कारण माना जाता है और दक्षिण चीन सागर विवादों का शांतिपूर्ण और स्वायत्त समाधान उत्तरदाताओं के बीच एक आम सहमति का प्रतिनिधित्व करता है।

विशेष रूप से, 84.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि दक्षिण चीन सागर विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण संवाद और परामर्श के माध्यम से किया जाना चाहिए। जबकि, 64.3 प्रतिशत का मानना है कि बाह्य शक्तियों के हस्तक्षेप के कारण कुछ दावेदार राज्य क्षेत्रीय संवाद में शामिल होने के बजाय बाहरी समर्थन पर निर्भर हो गए हैं, जिससे विवादों को स्वायत्त रूप से हल करने की क्षेत्रीय क्षमता और कमजोर हो गई है।

उधर, 74.4 फीसदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि निरंतर बाह्य हस्तक्षेप क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा होगा।

(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

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