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जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी छात्रों की FIR रद्द कराने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका, वीडियो में जाने मंगलवार को सुनवाई

 

केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों से जुड़ी FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार FIR रद्द कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा ले रही है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।

अनुच्छेद 142 के तहत FIR रद्द कराने की मांग

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिफ दर्ज FIR को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार ने याचिका दायर की है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने की मांग की गई है।अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की शक्ति देता है। केंद्र की ओर से इस मामले को अदालत के सामने रखते हुए जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। अब इस मामले में अदालत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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CJP के मार्च पर रोक लगाने से इनकार

यह मामला उस समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट में 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हो रही थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी कोर्ट में पेश हुए।सुप्रीम कोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसा मानने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है कि प्रस्तावित मार्च से कोई अप्रिय घटना होगी। कोर्ट ने प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी याद दिलाई।

प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासन से उम्मीद की जाती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखेगा। साथ ही सभी संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी और कानून के मुताबिक काम करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।अदालत का यह रुख ऐसे समय आया है जब दिल्ली में बड़े राजनीतिक और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हो रही है। कोर्ट ने फिलहाल मार्च पर प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रशासन को कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी है।

BRICS समिट के मद्देनजर मार्च पर रोक की मांग

मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह ने दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली में होने वाले BRICS समिट को देखते हुए राजधानी में बड़े जुलूस और प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।याचिका में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए मार्च पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया और प्रशासन को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।अब मंगलवार को छात्रों से जुड़ी FIR रद्द कराने की केंद्र की याचिका पर होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि अनुच्छेद 142 के तहत FIR को रद्द करने की केंद्र की मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है।