सीबीआई ने 1109 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में चार राज्यों में की छापेमारी
नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 1109 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी के मामले में 18 जुलाई को पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड में छह स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एम/एस गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मामले में की गई।
सीबीआई के अनुसार, कंपनी पर केनरा बैंक के साथ 1109 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने बैंक से विभिन्न फंड आधारित और गैर फंड आधारित वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के दौरान कथित रूप से स्टॉक का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, व्यापारिक देय राशि को कृत्रिम रूप से बढ़ाया और कंपनी के वित्तीय विवरणों में हेरफेर कर अधिक ऋण सुविधा हासिल की।
एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने ऋण की राशि का दुरुपयोग और डायवर्जन किया तथा खातों को 'एवरग्रीन' करने का भी प्रयास किया, जिससे केनरा बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
सीबीआई ने यह तलाशी अभियान भुवनेश्वर स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर चलाया। छापेमारी के दौरान ओडिशा के भुवनेश्वर में कंपनी के चार निदेशकों के आवासों, पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित कंपनी के पंजीकृत कार्यालय तथा उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित कंपनी की तीन विनिर्माण इकाइयों की तलाशी ली गई।
छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है।
वहीं एक अन्य घटनाक्रम में कुछ दिन पहले ही सीबीआई ने कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) के प्रबंध निदेशक अनुराग दानायक को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने 15 जुलाई को नोएडा में उन्हें 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
सीबीआई के अनुसार, अनुराग दानायक ने भोपाल स्थित एक फर्म, जो केएपीएल की अधिकृत सर्विस एजेंट है और मध्य प्रदेश के सरकारी संस्थानों को दवाइयों की आपूर्ति करती है, से करीब 15 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह रिश्वत फर्म के सर्विस एजेंट एग्रीमेंट को मंजूरी देने, चालू वित्तीय वर्ष के लिए लंबित नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने और फर्म को अतिरिक्त सरकारी संस्थान आवंटित करने के बदले मांगी गई थी। इसके अलावा चालू वर्ष में दवाइयों की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन में भी हिस्सा मांगा गया था।
--आईएएनएस
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