कैबिनेट में 4 एक्सप्रेसवे के 7 पैकेज मंजूर, टेंडर मैनेज के आरोपों पर एसीएस दीपक कुमार बोले- प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
लखनऊ, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूपी कैबिनेट द्वारा चार एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के सात पैकेज मंजूर किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और कुछ कंपनियों को जानबूझकर बाहर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस पर अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि यूपीडा की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ उन्हीं कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिन्होंने जरूरी जानकारी छिपाई थी या जिनका पिछला रिकॉर्ड खराब रहा था। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है और किसी के साथ पक्षपात नहीं किया गया।
एसीएस दीपक कुमार ने कहा, "कैबिनेट में चार एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं। इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-1 और पैकेज-2), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-1 और पैकेज-2) और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-1 और पैकेज-2) शामिल हैं। कुल सात पैकेज हैं। सोशल मीडिया पर इन परियोजनाओं को लेकर कुछ टिप्पणियां और आरोप लगाए गए। मैं आपके माध्यम से उन पर स्पष्टीकरण देना चाहता हूं। मुख्य रूप से दो आरोप लगाए गए थे।"
उन्होंने कहा कि पहला आरोप यह था कि टेंडर मैनेज किए गए हैं और इनमें दरें और अधिक कम हो सकती थीं। दूसरा आरोप यह था कि कई बोलीदाताओं (बिडर्स) को तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित किया गया है। पहले आरोप के संबंध में मैं बताना चाहूंगा कि कहा गया कि टेंडर 5 से 7 प्रतिशत तक और नीचे जा सकते थे। संभवतः यह जानकारी नहीं रही होगी कि जब हम किसी अनुमानित लागत (एस्टीमेट) को स्वीकृति देते हैं, तो उसी स्तर पर लगभग 5 प्रतिशत की कटौती कर दी जाती है।
एसीएस ने कहा कि यदि कोई विभाग उदाहरण के तौर पर 110 रुपए का प्रस्ताव लेकर आता है, तो विभिन्न समितियां उसकी दरों और औचित्य की समीक्षा करती हैं। मान लीजिए समीक्षा के बाद उसे 100 रुपए किया गया। इसके बाद भी हम यह मानकर चलते हैं कि टेंडर प्रक्रिया में कम से कम 5 प्रतिशत की कमी और आएगी। इसलिए हम उसे 95 रुपए के आधार पर स्वीकृत करते हैं और विभाग उसी अनुमान के अनुसार टेंडर जारी करता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार 5 प्रतिशत की जो दक्षता है, वह पहले से ही उसमें अंतर्निहित होती है। इसलिए यह आरोप कि टेंडर केवल 5 से 7 प्रतिशत नीचे गए हैं, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उदाहरण के लिए, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे पैकेज-1 में जो दर -2.52 प्रतिशत दिखाई दे रही है, वास्तविक रूप से वह -7.52 प्रतिशत है, क्योंकि 5 प्रतिशत की कटौती पहले से शामिल है। इसी प्रकार पैकेज-2 में जो -0.26 प्रतिशत दिख रहा है, वह वास्तविक रूप से -5.26 प्रतिशत है। अन्य पैकेजों में भी क्रमशः -5.12, -7.46, -6.35, -6.01 और -9 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसका मतलब ये है कि हमारे टेंडर 5.1 प्रतिशत से लेकर 9 प्रतिशत तक नीचे गए हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक था।
एसीएस दीपक कुमार ने कहा कि दूसरा आरोप तकनीकी अयोग्यता (टेक्निकल डिस्क्वालिफिकेशन) को लेकर था। कुल 16 बिडर्स ने भाग लिया था। अयोग्यता के कई आधार हो सकते हैं। कोई निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, कोई कुछ तथ्य छिपाकर बोली लगाता है या कोई पहले से किसी राज्य अथवा एजेंसी द्वारा डिबार किया गया होता है और इसकी जानकारी छिपाता है।
उन्होंने कहा कि जब ऐसी जानकारी हमारे संज्ञान में आती है, तो संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण मांगा जाता है। कई बार वे जवाब देते हैं, कई बार नहीं देते। एक प्रतिष्ठित बिडर का उदाहरण है जिसने यह जानकारी नहीं दी कि उसे दो राज्यों में डिबार किया जा चुका था। शिकायत मिलने के बाद हमने उसकी जांच की और उसे अयोग्य घोषित किया। वह हाईकोर्ट भी गया, लेकिन अदालत ने हमारी कार्रवाई को सही ठहराया।
एसीएस ने कहा कि इसी प्रकार कई बिडर्स ने अन्य राज्यों या राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी एजेंसियों के लिए काम किया है, जहां कैटेस्ट्रॉफिक फेलियर हुए हैं। उदाहरण के तौर पर किसी पुल, सड़क या अन्य संरचना का धंस जाना या ढह जाना। यदि ऐसी जानकारी हमारे सामने आती है, तो हम संबंधित कंपनी से जवाब मांगते हैं। यदि उनका जवाब संतोषजनक होता है, तो उन्हें तकनीकी रूप से योग्य माना जाता है, अन्यथा नहीं।
उन्होंने कहा कि मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूपीडा की पूरी बिडिंग प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी है। यह ई-टेंडरिंग प्रक्रिया है और इसमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता। जब वित्तीय बोलियां खोली जाती हैं, तो सभी बिडर्स ऑनलाइन या भौतिक रूप से उपस्थित रहते हैं और उनके सामने ही पूरी प्रक्रिया संपन्न होती है।
एसीएस दीपक कुमार ने कहा कि बिडिंग में कोई रोक नहीं है। कोई भी पात्र संस्था कहीं से भी भाग ले सकती है। कई प्रतिष्ठित ठेकेदारों ने इसमें भाग लिया है और हमें अच्छी प्रतिस्पर्धात्मक बोलियां प्राप्त हुई हैं। मैं पुनः दोहराना चाहूंगा कि ये बोलियां 5.1 प्रतिशत से लेकर 9 प्रतिशत तक अनुमानित लागत से नीचे आई हैं। ऐसा नहीं है कि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ, लेकिन पूर्व की अनेक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की तुलना में भी ये प्रतिस्पर्धी दरें हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की परियोजनाओं से तुलना करने पर भी यह स्थिति स्पष्ट होती है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यूपीडा द्वारा अपनाई जाने वाली टेंडर प्रक्रिया वर्षों से पूरी तरह पारदर्शी ई-टेंडरिंग प्रणाली पर आधारित है। इसमें कोई भी पात्र व्यक्ति या संस्था भाग ले सकती है। और जैसा कि हमारे एसीएस ने बताया, यदि कोई व्यक्ति या संस्था अपने बारे में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर प्रक्रिया में भाग लेती है, या कहीं और डिबार की गई है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
--आईएएनएस
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