घर बनाना हुआ महंगा: शहर में नई डीएलसी दरें लागू, 2 से 40% तक बढ़ोतरी; री-सर्वे के बाद दूसरी बड़ी वृद्धि
शहर में अब घर बनाना पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है। नई डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरें लागू कर दी गई हैं, जिनमें अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में 2 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है। री-सर्वे के आधार पर की गई यह बढ़ोतरी शहर में जमीन की मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए की गई है।
नई दरों के लागू होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और निर्माण से जुड़ी लागत पर सीधा असर पड़ेगा। खासतौर पर उन लोगों पर इसका प्रभाव पड़ेगा, जो आने वाले समय में प्लॉट खरीदकर घर बनाने की योजना बना रहे हैं। डीएलसी दर बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क भी बढ़ सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने शहर के विभिन्न इलाकों में जमीन की मौजूदा कीमतों का आकलन करने के लिए री-सर्वे कराया था। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नई डीएलसी दरें तय की गई हैं। जिन क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से हुए हैं और जमीन की मांग बढ़ी है, वहां दरों में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
शहर के प्रमुख इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुए शहरी विस्तार, नई कॉलोनियों के विकास और बढ़ती मांग को देखते हुए जमीन की कीमतों में लगातार बदलाव आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीएलसी दरों में संशोधन किया गया है।
हालांकि, रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि डीएलसी दरों में बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए घर खरीदना और बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बिल्डर्स और प्रॉपर्टी कारोबारियों के मुताबिक, जमीन की लागत बढ़ने से निर्माण लागत पर भी असर पड़ेगा, जिसका सीधा प्रभाव मकानों की कीमतों पर पड़ सकता है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि डीएलसी दरों का निर्धारण क्षेत्र की वास्तविक बाजार स्थिति और जमीन के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य जमीन के लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखना और सरकारी राजस्व व्यवस्था को बेहतर करना है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी डीएलसी दरों में वृद्धि की गई थी। री-सर्वे के आधार पर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। नई दरों के लागू होने के बाद अब जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों को संशोधित शुल्क के अनुसार भुगतान करना होगा।
नई डीएलसी दरों का असर आने वाले दिनों में प्रॉपर्टी बाजार पर दिखाई देने की संभावना है। जहां सरकार इसे बाजार के अनुरूप जरूरी बदलाव बता रही है, वहीं आम खरीदारों को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है।