ब्रिक्स की उपयोगिता का आकलन कूटनीतिक समर्थन से होना चाहिए : उदित राज
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आने के बीच कांग्रेस नेता उदित राज ने समिट की उपयोगिता और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा ब्रिक्स की मेजबानी की तारीफ किए जाने पर उदित राज ने कहा कि विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं है कि हर मुद्दे पर सरकार की आलोचना की जाए, लेकिन किसी आयोजन की तारीफ तभी होनी चाहिए, जब उसका वास्तविक लाभ देश को मिले।
उदित राज ने आईएएनएस से कहा कि ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि इनसे देश को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर क्या हासिल हुआ। क्या इससे एफडीआई में बढ़ोतरी हुई, विदेशी निवेश आया या देश के शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों का बाहर जाना रुका? केवल जीडीपी के आंकड़ों या बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की चर्चा से आम जनता को फायदा नहीं होता। जी-20 समेत पिछले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के परिणामों पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि इन आयोजनों से देश को जमीन पर कितना लाभ मिला।
उन्होंने ब्रिक्स में भारत के वित्तीय योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि अब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस मंच से भारत को वास्तविक आर्थिक लाभ क्या प्राप्त हुआ।
कांग्रेस नेता ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों और कुशल कामगारों से जुड़े मुद्दों और भारत की वैश्विक छवि पर ध्यान देने की जरूरत है। उदित राज ने पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने लिए व्यापक समर्थन सुनिश्चित करना चाहिए। ब्रिक्स की उपयोगिता का आकलन भी इसी आधार पर होना चाहिए कि संकट के समय भारत को कितना कूटनीतिक समर्थन मिलता है।
ब्रिक्स को लेकर पी चिदंबरम और शशि थरूर के अलग-अलग रुख पर उदित राज ने कहा कि इसे कांग्रेस के भीतर विरोधाभास के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। थरूर ने ब्रिक्स की मेजबानी को प्रतिष्ठित अवसर बताया है, जबकि चिदंबरम ने इससे मिलने वाले लाभ पर सवाल उठाए हैं। ब्रिक्स की मेजबानी रोटेशन के आधार पर होती है और इसे केवल प्रतिष्ठा का विषय बनाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने चिदंबरम को अर्थशास्त्री बताते हुए कहा कि उनका सवाल यही है कि देश को इससे वास्तविक आर्थिक लाभ कितना मिला?
उन्होंने कतर में फीफा विश्व कप का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े आयोजन का फायदा तभी है जब उससे पर्यटन और अर्थव्यवस्था को स्थायी लाभ मिले। उदित राज ने दावा किया कि भारत में पर्यटन क्षेत्र को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिला है।
संभावित विशेष संसद सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर उदित राज ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से पारित हो चुका है। सरकार ने इसके कार्यान्वयन को परिसीमन से जोड़कर आगे के लिए टाल दिया। कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया था और चाहती थी कि महिलाओं को आरक्षण जल्द लागू किया जाए। उदित राज ने भाजपा पर इस मुद्दे पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के खिलाफ गलत धारणा बनाने का आरोप लगाया।
केरल में हिंदी को लेकर हुए विवाद पर उदित राज ने राज्य सरकार और केरल की आपत्ति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी राज्य पर जबरन भाषा थोपना उचित नहीं है और इससे क्षेत्रीय भावनाएं आहत हो सकती हैं। हिंदी और अंग्रेजी देश में संपर्क की महत्वपूर्ण भाषाएं हैं, लेकिन दक्षिण भारतीय राज्यों की भाषाओं और पहचान का भी सम्मान किया जाना चाहिए। केवल हिंदी को प्राथमिकता देने की कोशिश से दक्षिण के राज्यों में असंतोष पैदा हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को किताब भेंट किए जाने पर उदित राज ने कहा कि इस तरह के उपहार कूटनीति में प्रतीकात्मक होते हैं, लेकिन सरकार को इनके बजाय बैठकों के वास्तविक परिणाम और देश के हित में हुए समझौतों की जानकारी देनी चाहिए। भारत की ऊर्जा नीति पर अमेरिकी दबाव दिखाई देता है। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय बैठकों की सफलता का आकलन केवल तस्वीरों और प्रतीकात्मक उपहारों से नहीं, बल्कि देश को मिले वास्तविक लाभ से होना चाहिए।
--आईएएनएस
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