ब्रिक्स को ‘चार अग्रणी’ बनने का आह्वान
बीजिंग, 13 सितंबर (आईएएनएस)। स्थानीय समयानुसार 12 सितंबर की दोपहर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के नेताओं की 18वीं बैठक के पहले चरण में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने 'युग की जिम्मेदारी साझा करें, अग्रणी शक्ति बनने का साहस करें' शीर्षक से महत्वपूर्ण भाषण दिया।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स सहयोग के 20 वर्षों के सफर का गहराई से जायजा लेते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भरता, सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने और उपलब्धियों से भरी एक असाधारण यात्रा रही है। उन्होंने ब्रिक्स के लिए 'चार अग्रणी' बनने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा, जिससे सहयोग तंत्र के भविष्य की दिशा और स्पष्ट हुई। साथ ही, उन्होंने उथल-पुथल और तेज बदलाव के दौर से गुजर रही दुनिया में स्थिरता और भरोसे की एक महत्वपूर्ण शक्ति का संचार किया। बैठक में शामिल गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रपति शी के प्रस्ताव की सराहना की और इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी व्यापक प्रतिक्रिया मिली।
इस वर्ष ब्रिक्स सहयोग की 20वीं वर्षगांठ है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, कोविड-19 महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी जोखिमों और चुनौतियों का मिलकर सामना करने से लेकर सदस्य देशों के ऐतिहासिक विस्तार और बहुआयामी व बहुस्तरीय सहयोग ढांचे के निर्माण तक, ब्रिक्स सहयोग तंत्र उभरते बाजारों और विकासशील देशों के सबसे प्रभावशाली सहयोग मंचों में से एक बन चुका है।
अब यह 'वृहद ब्रिक्स सहयोग' के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। ऐसे समय में जब दुनिया में सदी के बड़े बदलाव तेज़ी से हो रहे हैं, वैश्विक दक्षिण लगातार मजबूत हो रहा है और विश्व बहुध्रुवीयता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं एकपक्षवाद और शक्ति राजनीति की प्रवृत्तियां भी सक्रिय हैं। शांति, विकास, सुरक्षा और शासन के क्षेत्र में 'चार घाटे' लगातार सामने आ रहे हैं।
ऐसे में मानव समाज इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। जितनी अधिक चुनौतियां सामने आएंगी, ब्रिक्स देशों को उतनी ही मजबूती से इतिहास के सही पक्ष में खड़ा होना होगा, अग्रणी भूमिका निभाने का साहस दिखाना होगा, युग की जिम्मेदारी उठानी होगी और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और उचित दिशा में आगे बढ़ाने के लिए काम करना होगा।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग का 'चार अग्रणी' बनने का प्रस्ताव ब्रिक्स सहयोग के व्यावहारिक अनुभव पर आधारित है और वैश्विक बदलावों को ध्यान में रखते हुए आज की दुनिया के प्रमुख विरोधाभासों का जवाब देता है। यह विश्व बहुध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण की ऐतिहासिक प्रवृत्ति के अनुरूप है और इसका स्पष्ट व्यावहारिक महत्व होने के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीतिक मूल्य भी है।
नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में अग्रणी बनने का अर्थ है तकनीकी क्रांति के अवसरों को मजबूती से पकड़ना, विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन जैसे मंचों का बेहतर इस्तेमाल करना और ब्रिक्स देशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए नए औद्योगीकरण को बढ़ावा देना। इसके साथ ही, ओपन सोर्स और खुलेपन, सहयोग व साझाकरण को प्रोत्साहित करना, औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना तथा नवाचार से मिलने वाले लाभ को सभी देशों के साझा विकास की ताकत में बदलना भी जरूरी है।
इसी तरह, शांति और स्थिरता की रक्षा में अग्रणी बनने का अर्थ है साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और सतत सुरक्षा की अवधारणा का पालन करना। इसके तहत शीत युद्ध की मानसिकता और खेमेबाजी का दृढ़ता से विरोध करना, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध करना, क्षेत्रीय हॉटस्पॉट मुद्दों के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाना और संघर्षों के मूल कारणों को दूर करने के लिए समाधान तलाशना शामिल है। वहीं, सभ्यताओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में अग्रणी बनने का मतलब है पूरी मानवता के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाना।
इसके लिए ब्रिक्स सांस्कृतिक आदान-प्रदान मंच जैसे कार्यक्रमों का आयोजन, शासन के अनुभवों को साझा करना तथा संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और युवा आदान-प्रदान के जरिए लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ाना जरूरी है, ताकि विभिन्न सभ्यताएं सामंजस्यपूर्ण तरीके से साथ रह सकें।
इसके अलावा, वैश्विक शासन में सुधार और उसे बेहतर बनाने में अग्रणी बनने का अर्थ है संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और भूमिका को मजबूती से बनाए रखना, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा करना और संरक्षणवादी बाधाओं को दूर करना। साथ ही, साइबर स्पेस, बाहरी अंतरिक्ष और गहरे समुद्र जैसे नए क्षेत्रों के शासन में सक्रिय रूप से भाग लेना और वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज को प्रभावी ढंग से मजबूत करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
अगले वर्ष चीन ब्रिक्स का अध्यक्ष देश बनेगा और ब्रिक्स देशों के नेताओं की 19वीं बैठक की मेज़बानी करेगा। ब्रिक्स सहयोग की 20वीं वर्षगांठ के इस ऐतिहासिक मोड़ पर, अगर ब्रिक्स देश एकजुट होकर हाथ मिलाते हुए आगे बढ़ते हैं और 'चार अग्रणी' बनने की दिशा में लगातार प्रयास करते हैं, तो वे ब्रिक्स सहयोग के तीसरे 'स्वर्णिम दशक' की सफल शुरुआत कर सकते हैं। साथ ही, मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है और दुनिया के साझा विकास के लिए लगातार नई ताकत दे सकता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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