ब्रिक्स समिट में करेंसी नेगोशिएशन पर क्या बात होने वाली है, अनीश गवांडे ने उठाया सवाल
मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स समिट, एमपीएससी परीक्षा विवाद और भारत की जीडीपी ग्रोथ पर एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने अपनी बात रखी। उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि एक पार्टी में रहकर भी अलग-अलग राय होने का अधिकार सबको है।
उन्होंने पी. चिदंबरम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार से पूछा कि ब्रिक्स समिट का हमें क्या फायदा होगा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। शशि थरूर ने कहा कि ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण संस्थान है। इसका ग्लोबल राजनीति में आज बड़ा रोल है, लेकिन भारत को इसका जवाब देना चाहिए कि आज जब रुपया का वैल्यू कम होकर एक डॉलर के मुकाबले 100 रुपए तक पहुंच रहा है, ग्लोबल ऑयल क्राइसिस एआई के माध्यम से क्रिएट की गई है, जब ग्लोबल स्तर में आर्थिक संकट बना हुआ है। इस स्थिति में ब्रिक्स का एजेंडा क्या है। इसमें भारत का रोल क्या है। इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने ब्रिक्स को लेकर होर्डिंग तो पूरे दिल्ली में लगा दी, लेकिन इसका एजेंडा अभी तक किसी को नहीं पता है। ब्रिक्स समिट से क्या ठोस नतीजे निकलेंगे? भारत सरकार कौन से नए विचार सामने ला रही है? दुर्भाग्य से हमारे पास इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी या विवरण नहीं है।
अनीश गवांडे ने आगे एमपीएससी पेपर लीक मामले पर बात करते हुए कहा कि आज महाविकास अघाड़ी एमपीएससी में हुए घोटालों पर एकजुट है। इसको लेकर पुणे में हुए प्रोटेस्ट में हमारे सभी नेता शामिल हुए थे। शुक्रवार को महाविकास अघाड़ी की तरफ से आदित्य ठाकरे और कांग्रेस के नेता गवर्नर के साथ बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि एमपीएससी परीक्षा विवाद महाराष्ट्र का एक ज्वलंत मुद्दा है। इस मामले में हाल में एक छात्र ने आत्महत्या की है। इस हादसे के पीड़ित परिवार ने सरकार से जवाब मांगे हैं। हालांकि, अभी तक एमपीएससी के चेयरमैन ने कोई जवाब नहीं दिया है।
एमपीएससी पर जो भ्रष्टाचार के आरोप दिखाई दे रहे हैं, ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर जो पेपर लीक की घटना हुई है। इससे एमपीएससी परीक्षा का जो स्टेटस था, वह अब घटता जा रहा है। इसके खिलाफ हम सबको आवाज उठाने की जरूरत है।
जीडीपी ग्रोथ पर अनीश गवांडे ने कहा कि आईएमएफ उसी डेटा पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है, जो सरकार उन्हें देती है। आज सरकार ने उन्हें 7.8 जीडीपी का डेटा दिया है और आईएमएफ ने माना है कि भारत सरकार ने हमेशा उन्हें एक स्वतंत्र और फैक्ट-चेक डेटा दिया है और यह भी एक स्वतंत्र फैक्ट-चेक डेटा होगा, हालांकि भारत के 7.8 जीडीपी को लेकर कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि इसका डेटा बढ़ा हुआ है। यह गंभीर मुद्दे हैं, जिन्हें उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जीडीपी का डेटा धुंधला है या आईएमएफ गलत कह रही है या इस डेटा को नहीं मान रही है, लेकिन भारतीय डेटा की वैधता उतनी ही मजबूत होती है जितनी कि संस्थान उसे बनाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सरकार आईएमएफ से लोन लेने के बजाय, उसमें योगदान देने वाली रही है। उन्होंने कहा कि आज वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा लोन इंडिया को जाता है।
अनीश गवांडे ने कहा कि देश के लिए यह गर्व की बात है कि भारत ब्रिक्स समिट को होस्ट कर रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स की स्थापना 20 वर्ष पहले, 2006 में हुई थी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जो कि दुनिया के बड़े लीडरों में से एक थे, भी ब्रिक्स की स्थापना में शामिल थे। उस दौरान भी मनमोहन सिंह ने करेंसी नेगोशिएशन को लेकर बात की थी और आज जब दिल्ली में ब्रिक्स समिट हो रही है, तो पहला सवाल उठता है कि करेंसी नेगोशिएशन को लेकर क्या बात होने वाली है।
--आईएनएस
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