BREAKING : मणिपुर में फिर भड़की हिंसा! मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन, भीड़ को हटाने के लिए छोड़े गए आंसू गैस के गोले
मणिपुर में ताजा गोलीबारी की घटना के बाद तनाव बढ़ गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को राजधानी इंफाल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के आवास के बाहर शव लेकर पहुंच गए और उसे गेट के सामने रखकर विरोध जताने लगे। हालात बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह विरोध इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद हुआ। अधिकारियों के अनुसार, जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों के एक समूह पर संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर हमला किया था। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा तीन लोगों के लापता होने की भी खबर सामने आई।
लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों पर हुई गोलीबारी
अधिकारियों के मुताबिक, करीब 16 लोगों का एक समूह सोमवार सुबह लगभग 7 बजे अपने गांव के पास की पहाड़ियों में जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने गया था। इसी दौरान उन पर गोलीबारी की गई।
यह घटना इंफाल पूर्व जिले के नोंगशुम गांव के पास कांगपोकपी जिले के इलाके में हुई। हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद तीन लापता लोगों की तलाश की जा रही थी।
मृतकों की पहचान 35 वर्षीय अरुबम रोनिल और 51 वर्षीय लैरेनलाकपम इनओबी के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर जताया विरोध
गोलीबारी और दो लोगों की मौत की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोग इंफाल में मुख्यमंत्री के आवास के बाहर एकत्रित हो गए। प्रदर्शनकारियों ने शव को आवास के मुख्य गेट के सामने रख दिया और घटना को लेकर नाराजगी जताई।
स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को हटाने और हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया।
घटना के समय मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह अपने आवास पर मौजूद थे या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
तीन लोगों के लापता होने की खबर
गोलीबारी की घटना के बाद तीन लोगों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई। अधिकारियों की ओर से उनकी तलाश किए जाने की बात कही गई है। घायलों की संख्या और उनकी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।
फिलहाल, घटना की परिस्थितियों और हमले के पीछे शामिल लोगों की पहचान को लेकर जांच से जुड़ी जानकारी का इंतजार है। संदिग्ध उग्रवादियों की भूमिका को लेकर सामने आए दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
मणिपुर में पहले भी सामने आई हिंसा की घटनाएं
मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हाल के दिनों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की खबर आई थी। उस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
राज्य में अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव और हिंसक घटनाओं के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है। ताजा गोलीबारी और मुख्यमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, इस घटना में शामिल लोगों की पहचान, लापता व्यक्तियों की स्थिति और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी अहम होगी।
मणिपुर में ताजा गोलीबारी की घटना के बाद तनाव बढ़ गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को राजधानी इंफाल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के आवास के बाहर शव लेकर पहुंच गए और उसे गेट के सामने रखकर विरोध जताने लगे। हालात बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह विरोध इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद हुआ। अधिकारियों के अनुसार, जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों के एक समूह पर संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर हमला किया था। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा तीन लोगों के लापता होने की भी खबर सामने आई।
लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों पर हुई गोलीबारी
अधिकारियों के मुताबिक, करीब 16 लोगों का एक समूह सोमवार सुबह लगभग 7 बजे अपने गांव के पास की पहाड़ियों में जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने गया था। इसी दौरान उन पर गोलीबारी की गई।
यह घटना इंफाल पूर्व जिले के नोंगशुम गांव के पास कांगपोकपी जिले के इलाके में हुई। हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद तीन लापता लोगों की तलाश की जा रही थी।
मृतकों की पहचान 35 वर्षीय अरुबम रोनिल और 51 वर्षीय लैरेनलाकपम इनओबी के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर जताया विरोध
गोलीबारी और दो लोगों की मौत की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोग इंफाल में मुख्यमंत्री के आवास के बाहर एकत्रित हो गए। प्रदर्शनकारियों ने शव को आवास के मुख्य गेट के सामने रख दिया और घटना को लेकर नाराजगी जताई।
स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को हटाने और हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया।
घटना के समय मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह अपने आवास पर मौजूद थे या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
तीन लोगों के लापता होने की खबर
गोलीबारी की घटना के बाद तीन लोगों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई। अधिकारियों की ओर से उनकी तलाश किए जाने की बात कही गई है। घायलों की संख्या और उनकी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।
फिलहाल, घटना की परिस्थितियों और हमले के पीछे शामिल लोगों की पहचान को लेकर जांच से जुड़ी जानकारी का इंतजार है। संदिग्ध उग्रवादियों की भूमिका को लेकर सामने आए दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
मणिपुर में पहले भी सामने आई हिंसा की घटनाएं
मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हाल के दिनों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की खबर आई थी। उस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
राज्य में अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव और हिंसक घटनाओं के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है। ताजा गोलीबारी और मुख्यमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, इस घटना में शामिल लोगों की पहचान, लापता व्यक्तियों की स्थिति और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी अहम होगी।