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Breaking Update : Newborn Trafficking Investigation: बिहार-यूपी में नवजातों की खरीद-फरोख्त का आरोप, अंडरकवर जांच में सामने आया नेटवर्क
 

 

बिहार और उत्तर प्रदेश में नवजात बच्चों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर एक निजी मीडिया संस्था की अंडरकवर जांच में चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। जांच के मुताबिक, कुछ बिचौलिए, अस्पतालों से जुड़े लोग और कथित एजेंट अविवाहित और नाबालिग गर्भवती लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाकर नवजातों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने का नेटवर्क चला रहे हैं।
जांच में दो ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने के बाद कथित तौर पर नवजात बच्चों को उनसे अलग कर दिया गया। एक मामले में आशा कार्यकर्ता पर बच्चे को अपने पास रखने और बाद में बेचने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में डॉक्टर और एक युवक की गिरफ्तारी का दावा किया गया है।


90 दिनों तक अंडरकवर जांच का दावा
निजी मीडिया संस्था के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क तक पहुंचने के लिए महिला रिपोर्टर ने करीब 90 दिनों तक अंडरकवर जांच की। रिपोर्टर ने आशा कार्यकर्ता की भूमिका में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई जिलों में अस्पतालों और कथित एजेंट्स से संपर्क किया।
जांच में दावा किया गया है कि करीब 20 जिलों में 150 से ज्यादा अस्पतालों और कथित एजेंट्स से संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान कथित तौर पर नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त, अस्पताल में डिलीवरी कराने और बच्चों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने से जुड़े ऑफर सामने आए।
पटना से शुरू हुई पड़ताल
जांच की शुरुआत पटना से किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंडरकवर रिपोर्टर ने कई अस्पतालों में संपर्क किया। इनमें से कुछ जगहों पर कथित तौर पर अस्पताल से जुड़े लोगों ने अविवाहित गर्भवती महिलाओं के मामलों को लेकर बातचीत की।
एक अस्पताल से जुड़े व्यक्ति पर आरोप है कि उसने ऐसे मामलों में डिलीवरी के बाद नवजात को दूसरे लोगों तक पहुंचाने की बात कही। बातचीत में बच्चों की कीमत और कथित बिचौलियों के नेटवर्क का भी जिक्र सामने आया।
निजी मीडिया संस्था के अनुसार, रिपोर्टर ने इस दौरान एक काल्पनिक मामले का इस्तेमाल कर कथित एजेंट से बातचीत की। बच्चे के जन्म के बाद कथित एजेंट ने उसकी तस्वीर और वीडियो मांगने की बात कही। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके बाद बच्चे के लिए रकम की पेशकश भी की गई।


अस्पताल से जुड़े लोगों पर भी लगाए गए आरोप
जांच के दौरान एक अन्य अस्पताल के मैनेजर से संपर्क किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर ने कथित तौर पर डिलीवरी, नवजात की देखभाल और उसे आगे दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने की व्यवस्था की बात कही।
जांच में अस्पतालों में NICU जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करके नवजातों को सुरक्षित रखने और बाद में उन्हें कथित खरीदारों तक पहुंचाने की बात सामने आने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन बातचीत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अस्पतालों या व्यक्तियों का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
बेतिया में भी कथित नेटवर्क का दावा
पड़ताल के दौरान रिपोर्टर को बेतिया में कथित तौर पर सक्रिय एक नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया। इसके बाद एक निजी अस्पताल से जुड़े व्यक्ति से संपर्क किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त व्यक्ति ने बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने का दावा किया। उसने कथित तौर पर यह भी कहा कि ऐसे मामलों में बच्चों की पहचान छिपाना आसान होता है।
अंडरकवर बातचीत में नाबालिग गर्भवती लड़की से जुड़े मामले पर भी कथित तौर पर चर्चा हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरोपी ने डिलीवरी के बाद बच्चे को अपने पास रखने और उसे दूसरे लोगों तक पहुंचाने की बात कही।
बच्चे की खरीद के लिए कथित तौर पर तय होती थी रकम
जांच के दौरान सामने आए कथित संवादों में नवजात की मांग के आधार पर रकम तय करने की बात कही गई। कुछ मामलों में लड़के की मांग होने और इसके आधार पर अधिक पैसे मिलने का दावा भी सामने आया।
रिपोर्ट के अनुसार, कथित एजेंटों ने बच्चों को ऐसे परिवारों तक पहुंचाने की बात कही, जिनके यहां संतान नहीं है। कुछ लोगों को संभावित खरीदार के रूप में पेश किए जाने का भी दावा किया गया है।
सरकारी अस्पताल से कनेक्शन का भी दावा
जांच में एक महिला से संपर्क का भी उल्लेख है, जिसने कथित तौर पर सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने और वहां अपने संपर्क होने की बात कही। उसके द्वारा अविवाहित गर्भवती लड़कियों के मामलों को संभालने और बच्चे को दूसरे परिवार तक पहुंचाने का दावा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
उसने कथित तौर पर बताया कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में पहुंच चुकी लड़कियों को छिपाकर रखने और डिलीवरी के बाद नवजात को अलग करने की व्यवस्था की जा सकती है।
नाबालिगों के मामलों ने बढ़ाई चिंता
इस पूरी जांच में सबसे गंभीर पहलू नाबालिग लड़कियों से जुड़े मामले हैं। यदि जांच में सामने आए आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसमें बच्चों के अधिकार, नाबालिगों की सुरक्षा और नवजातों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में पहचान और व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करना भी संवेदनशील और कानूनी रूप से प्रतिबंधित हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में पीड़ितों की पहचान उजागर किए बिना ही रिपोर्टिंग की जानी चाहिए।
जांच और कार्रवाई से ही साफ होगी पूरी सच्चाई
निजी मीडिया संस्था की अंडरकवर जांच में सामने आए वीडियो, बातचीत और दावों के आधार पर कथित नेटवर्क की तस्वीर सामने आती है, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी।
यदि अस्पतालों, डॉक्टरों, बिचौलियों या अन्य लोगों की भूमिका जांच में साबित होती है, तो नवजातों की कथित खरीद-फरोख्त के इस नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।