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BREAKING : अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा! 105 बार चोरी के CCTV फुटेज सुप्रीम कोर्ट में पेश

 

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज जांच की प्रगति को लेकर अहम जानकारी सामने आई। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विशेष जांच दल यानी SIT की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर अदालत को जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां दीं। कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और जांच में सामने आए सबूतों के बारे में जानकारी सुनी।

CCTV फुटेज में 105 घटनाओं का जिक्र

सुनवाई के दौरान बताया गया कि SIT ने मंदिर परिसर और चंदा गिनने की प्रक्रिया से जुड़े CCTV फुटेज का विस्तृत विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, फुटेज की जांच में कथित तौर पर चंदा चोरी की 105 घटनाएं सामने आई हैं।

SIT ने आरोपियों की पहचान और उनकी कथित भूमिका तय करने के लिए सिर्फ CCTV फुटेज पर निर्भर नहीं किया, बल्कि दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया। इनमें गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और जांच के दौरान जुटाई गई अन्य सामग्री शामिल बताई गई है।

इससे पहले की जांच में भी CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा गया था। जांच एजेंसी ने चंदा गिनने की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और कैश हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया की जांच की थी।

अदालत के सामने रखे गए सबूत

सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि SIT ने जांच के दौरान मिले सबूतों को व्यवस्थित तरीके से देखा है। CCTV फुटेज में दिखाई देने वाली गतिविधियों का मिलान गवाहों के बयानों और अन्य जांच सामग्री से किया गया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संदिग्ध घटनाओं के आधार पर आरोपियों की पहचान किस तरह की गई और फुटेज तथा दूसरे डिजिटल मटीरियल का विश्लेषण कैसे किया गया।

यानी जांच का फोकस केवल इस बात पर नहीं रहा कि CCTV में क्या दिखाई दे रहा है, बल्कि यह भी देखा गया कि उस फुटेज को अन्य साक्ष्यों से किस तरह जोड़ा जा सकता है।

कीमती सामान की रसीद और SBI लॉकर का भी जिक्र

सुप्रीम कोर्ट के सामने SIT की स्टेटस रिपोर्ट में मंदिर में मिलने वाले कीमती सामान से जुड़ी व्यवस्था की भी जानकारी दी गई।

बताया गया कि कीमती सामान के लिए रसीद एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती है। इसके बाद संबंधित सामान और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाती है, जिसमें SBI लॉकर का भी इस्तेमाल बताया गया है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने दान और चढ़ावे को संभालने, उसकी गिनती करने, रिकॉर्ड तैयार करने और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा था।

कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई?

इस मामले में पुलिस पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। आरोपियों में चंदा गिनने और मंदिर की दान व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल बताए गए थे।

जांच में कुछ आरोपियों के ठिकानों से नकदी और अन्य सामान बरामद किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। एक SIT रिपोर्ट के हवाले से यह भी बताया गया था कि एक आरोपी के पास से नकदी, विदेशी मुद्रा और आभूषण समेत अन्य सामान बरामद हुआ। हालांकि, किसी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

SIT की जांच लगभग पूरी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। उनके मुताबिक, 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक चार्जशीट पर आगे फैसला करने के निर्देश दिए हैं।

इसका मतलब यह है कि अब जांच का अगला बड़ा चरण अदालत के सामने चार्जशीट आने के बाद शुरू होगा और उसमें दर्ज आरोपों तथा साक्ष्यों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच होगी।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी मांग चुका है SIT की रिपोर्ट

राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी SIT से जांच की प्रगति की रिपोर्ट मांग चुका है। जुलाई में अदालत ने SIT को जांच की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह जांच की प्रगति को देखना चाहती है।

इसके बाद SIT ने जांच आगे बढ़ाई और मामले से जुड़े लोगों, बैंकिंग लेनदेन, CCTV फुटेज, दान गिनने की प्रक्रिया और अन्य रिकॉर्ड की जांच की।

अगस्त में SIT द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपे जाने की खबर भी सामने आई थी।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सबसे अहम पड़ाव चार्जशीट दाखिल होना है। अगर 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होती है, तो उसमें जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों का विवरण सामने आ सकता है।

इसके बाद मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार चार्जशीट पर संज्ञान लेने और आगे की प्रक्रिया को लेकर निर्णय करेंगे। मामले में आरोप साबित होने या न होने का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा।

राम मंदिर से जुड़ा होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील है। ऐसे में SIT की रिपोर्ट, चार्जशीट और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।