मुंबई की गंदगी पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त: BMC से 26 वार्डों के जिम्मेदार अधिकारियों की सूची और SOP मांगी
मुंबई की सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर लगातार जमा हो रहे कचरे को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने शहर की सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं और संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे। अदालत ने साफ किया कि अब लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
‘पूरा शहर गंदगी से भरा है’, HC ने लगाई फटकार
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने गुरुवार को कचरा और सफाई व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान BMC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि शहर में कई ऐसे चिन्हित स्थान हैं, जहां बार-बार कचरे के ढेर दिखाई देते हैं, लेकिन संबंधित वार्ड अधिकारी पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि अगर मुंबई खुद को अंतरराष्ट्रीय शहर कहती है तो बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था भी उसी स्तर की होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, जमीन पर बदलाव दिखाई देना चाहिए।
26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगी
हाई कोर्ट ने BMC को मुंबई के सभी 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वच्छता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सफाई व्यवस्था के लिए लागू Standard Operating Procedure (SOP) भी मांगी है।
कोर्ट का जोर इस बात पर है कि किसी इलाके में कचरा मिलने की स्थिति में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और उसके स्तर पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए हैं।
‘लापरवाही हुई तो अधिकारी पर होगी कार्रवाई’
सुनवाई के दौरान बेंच ने चेतावनी दी कि यदि सड़कों पर कचरा पड़ा मिला और जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की तो उनके खिलाफ कदम उठाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना जरूरी है, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव दिखाई दे रहा है।
अदालत ने BMC आयुक्त को व्यवस्था सुधारने और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सख्त आदेश जारी किए जाएंगे।
कचरा फेंकने वालों पर भी सख्ती की जरूरत
हाई कोर्ट ने केवल BMC अधिकारियों की जिम्मेदारी की बात नहीं की, बल्कि सार्वजनिक सड़कों पर कचरा फेंकने वाले लोगों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने का सुझाव दिया। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से भारी जुर्माने और जरूरत पड़ने पर आपराधिक कार्रवाई जैसे प्रावधानों पर विचार करने को कहा।
अदालत ने कचरे के सेग्रीगेशन यानी गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था को भी प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया। कोर्ट का कहना है कि BMC को एक मॉडल नगर निगम के तौर पर काम करना चाहिए।
सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता का सुझाव
हाई कोर्ट ने सफाई को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद लेने का सुझाव भी दिया। अदालत का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि आम लोगों को भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाने के लिए जागरूक करना जरूरी है।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि BMC 26 वार्डों के जिम्मेदार अधिकारियों की सूची और सफाई व्यवस्था की SOP कोर्ट के सामने किस तरह पेश करती है और जमीन पर सफाई व्यवस्था में कितना सुधार दिखाई देता है।