भाजपा सांसदों का विपक्ष पर हमला, लोकसभा में हंगामा और मर्यादा भंग करने का आरोप
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। भाजपा के सांसदों ने हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के व्यवहार और संसद की मर्यादा को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उनका व्यवहार रहता है, वह देश के लिए सही नहीं है। उन्हें व्यवहार में सुधार लाना चाहिए और सदन की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सभी सांसदों को पत्र भेजना लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने बिना किसी विषय के सदन में हंगामा किया। यह अविश्वास प्रस्ताव राहुल गांधी की जिद के कारण आया और उन्होंने उम्मीद जताई कि अब वे ऐसे धरने बंद करेंगे।
भाजपा सांसद कमलजीत सेहरावत ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता की सराहना करते हुए बताया कि ओम बिरला जब भी सदन के किसी भी सदस्य से बात करते हैं, चाहे वो पक्ष से हो या विपक्ष से हो, उसमें भेद-भाव नहीं होता है। लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार नेता प्रतिपक्ष को भी कहा कि वे अपनी बात रखें, लेकिन बार-बार वे उसे नजरअंदाज करते हैं और बाद में आरोप लगाते हैं कि उन्हें बात नहीं रखने दी जाती है, लेकिन उनका नजरअंदाज करना और बाद में आरोप लगाना चिंता का विषय है।
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने लोकसभा अध्यक्ष के लिए प्रधानमंत्री के पत्र पर कहा, "निश्चित रूप से संसद के अंदर विपक्ष का जिस प्रकार का व्यवहार है, मुझे लगता है कि उनके दिमाग में उनके खुद के अलावा कोई और सम्मानित है ही नहीं। वे न तो न्यायालय का सम्मान करते हैं, न संसद का, न राष्ट्रपति का, न उपराष्ट्रपति का और न ही स्पीकर का। मुझे लगता है कि उनके कोई सुधरने की गुंजाइश नहीं है।"
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष ने गैर जिम्मेदाराना तरीके अपनाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष को निशाना बनाया गया और अब चुनाव आयोग पर हमला किया जा रहा है। भाजपा सांसद ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का राजनीतिक स्टंट करार दिया।
भाजपा सांसदों ने एक स्वर में कहा कि लोकसभा का उद्देश्य विवाद नहीं, बल्कि देश के चुने हुए 140 करोड़ लोगों के लिए काम करना है। उन्होंने विपक्ष पर हंगामा करने और सदन की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों हो सकती हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
--आईएएनएस
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