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'नेताजी के योगदान को भुलाने के अनेक प्रयास किए गए', सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा

 

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और टीएमसी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस की वजह से अंग्रेजों का यह सपना पूरी तरह से चकनाचूर हो गया।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछना चाहता हूं कि आपकी पार्टी भी तो कांग्रेस से निकली है, आप भी तो कांग्रेस में ही थे। इतने दिन तक क्यों याद नहीं आया कि नेताजी को वो सम्मान और वो स्थान मिलना चाहिए? यदि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति टीएमसी के मन में लेशमात्र भी सम्मान है, तो उन्हें अपने नाम में से कांग्रेस हटा देना चाहिए। अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उनको तृणमूल अर्थात जड़-मूल से खत्म कर देगी।"

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती के सबसे बड़े गौरव में से एक माने जाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति सच्चा सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेश किया है। 2018 में जब आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूर्ण हुए थे, उस समय हमारे जो सेनानी जीवित थे, उन सबको पूर्ण गौरव और सम्मान के साथ गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया और उनका सम्मान किया। किसी राजनीतिक दल ने प्रधानमंत्री मोदी से पूर्व इस तरह का सम्मान नेताजी को नहीं दिया। इंडिया गेट पर जहां 1968 तक जॉर्ज पंचम की मूर्ति रही, वहां नेताजी की मूर्ति को पुनर्स्थापित किया।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 को माउंटबेटन की ओर से शपथ ली थी। अतः पूर्ण स्वतंत्र विचारों से स्वतंत्र भारत की पहली स्वतंत्र सरकार स्थापित करने के प्रथम प्रतीक सुभाष चंद्र बोस के स्मरण का यह पर्व है। भारत की स्वतंत्रता में अनेक लोगों ने अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं, परंतु नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान सर्वाधिक अग्रणी और सर्वाधिक अविस्मरणीय हैं, परंतु उसे विस्मृत करने के अनेक कुत्सित प्रयास भारत के इतिहास में हुए हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने वर्ष 1955 में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि भारत को स्वतंत्रता इसलिए मिली, क्योंकि भारतीय सेना के सैनिकों की निष्ठा अंग्रेजों के प्रति पहले जैसी नहीं रह गई थी। उनके अनुसार, ब्रिटिश हुकूमत यह मानकर चल रही थी कि भारतीय सैनिकों की वफादारी कभी नहीं बदलेगी, लेकिन सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व और प्रयासों ने अंग्रेजों की इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने का उपयुक्त अवसर बताया था। इसके बावजूद, उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन पर दबाव क्यों नहीं बनाया और तीन वर्षों तक इंतजार क्यों किया।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैं कांग्रेस वर्किंग कमेटी में 14 जुलाई, 1942 में पारित रेजोल्यूशन में कहा गया कि 'ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध जो नकारात्मक भाव है, उसे सहयोग और सकारात्मक में बदलेंगे और हम एवं ब्रिटेन मिलकर दुनिया के लोगों और भारत के लोगों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाएंगे, आपकी फौजें यहां रहें, इसके लिए कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से समर्थन के लिए तैयार है।' ये मूल कारण था कि आपने (कांग्रेस) 1931 से लेकर 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई भी आंदोलन नहीं किया।"

--आईएएनएस

एसएके/एएस