☰
×

भाजपा की राजनीति हिंदू राष्ट्र बनाने तक सीमित, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर नहीं हो रहा काम : हुसैन दलवई

 

मुंबई, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र के एमएलसी चुनाव के नतीजों और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बयानों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़ना गलत कदम था। एमएलसी चुनावों में शरद पवार की पार्टी ने दो सीटें जीतीं, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी एक भी सीट नहीं जीत पाए। दलवई ने दावा किया कि आने वाले समय में राष्ट्रवादी कांग्रेस के फिर से एकजुट होने और भाजपा से दूरी बनाने की संभावना है।

दलवई ने कहा कि एकनाथ शिंदे की राजनीति इसी तरह चलती रही है। उन्होंने शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को तोड़ने के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि चुनाव परिणामों के बाद अब उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनावों में शरद पवार की पार्टी ने दो सीटें जीतीं, जबकि वे एक भी सीट नहीं जीत पाए। इसीलिए वे परेशान हैं। इन नतीजों से राजनीतिक समीकरणों को लेकर भाजपा और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ी है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का तरीका सभी को पता है। भाजपा ने शिवसेना और एनसीपी को तोड़ा और अलग-अलग जगहों पर इसी तरह की राजनीति की। उन्होंने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को परेशान करने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया। दलवई ने कहा कि भाजपा की राजनीति हिंदुत्व के नाम पर हिंदू राष्ट्र बनाने तक सीमित है, जबकि विकास, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर पर्याप्त काम नहीं हो रहा है। नौकरियां जा रही हैं, नई नौकरियां नहीं मिल रही हैं और स्कूल बंद हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए दलवई ने कहा कि आरएसएस से जुड़े लोग सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर हैं। जनता अब इनके खिलाफ है और आने वाले चुनावों में भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव में वोट चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए ऐसे रास्ते अपनाए जाते हैं। दलवई ने वर्ष 2002 के दंगों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगे आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन मुद्दों पर उनकी ओर से जवाब नहीं दिया जाता।

देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि महंगाई बढ़ रही है और आम लोगों के सामने खाने-पीने की समस्या है। उन्होंने स्कूलों के बंद होने और अस्पतालों की कमी का मुद्दा उठाया। अर्थव्यवस्था का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो रहा है। अर्थव्यवस्था के केंद्रीकरण से आम जनता का क्या भला होगा, यह समझना जरूरी है।

व्यापारियों की चिंता और बाजार बंद होने से होने वाले नुकसान के सवाल पर दलवई ने कहा कि एक दिन बाजार बंद रहने से कितना नुकसान होगा, इस पर इतनी चिंता जताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मेट्रो और बस सेवाओं के बंद होने का उदाहरण देते हुए भाजपा पर सवाल उठाया। दलवई ने कहा कि जब मेट्रो और बस सेवा बंद की गई थी, तब व्यापारियों को होने वाले नुकसान पर इसी तरह सवाल क्यों नहीं उठाए गए। एक दिन बाजार बंद होने से होने वाले नुकसान को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए।

--आईएएएस

पीएसके/वीसी