BJP ने 7 प्रमुख मोर्चों के प्रभारी किए नियुक्त, हरीश द्विवेदी-डी. वीडियो में जाने पुरंदेश्वरी समेत इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को अपने संगठन में एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति करते हुए पार्टी के 7 प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों के नामों का ऐलान कर दिया। पार्टी ने युवा, महिला, अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), किसान, अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। सात नियुक्तियों में से दो प्रभारी मध्य प्रदेश से हैं।
किस नेता को कौन-सी जिम्मेदारी?
भाजपा की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है, जबकि डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है।वहीं, सतीश पूनिया को ST मोर्चे का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी ने संजय भाटिया को SC मोर्चे और वैजयंत पांडा को OBC मोर्चे का प्रभारी बनाया है।इसके अलावा लाल सिंह आर्या को किसान मोर्चा और गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने अपने प्रमुख सामाजिक और संगठनात्मक वर्गों के बीच पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सात मोर्चों की जिम्मेदारी
- युवा मोर्चा: हरीश द्विवेदी
- महिला मोर्चा: डी. पुरंदेश्वरी
- SC मोर्चा: संजय भाटिया
- OBC मोर्चा: वैजयंत पांडा
- किसान मोर्चा: लाल सिंह आर्या
- ST मोर्चा: सतीश पूनिया
- अल्पसंख्यक मोर्चा: गजेंद्र पटेल
नितिन नवीन की नई टीम में 65 सदस्य
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहले ही अपनी नई टीम का ऐलान कर चुके हैं। नई टीम में कुल 65 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें 12 महिलाएं हैं, यानी टीम में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है।पार्टी ने संगठन में अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। नई टीम में 14 नेताओं को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, जबकि 51 नए सदस्यों को संगठन में शामिल किया गया है।
73 साल की वसुंधरा राजे सबसे वरिष्ठ
भाजपा की नई टीम में उम्र के लिहाज से भी खास विविधता देखने को मिलती है। 73 वर्षीय वसुंधरा राजे टीम की सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं। वहीं, 35 वर्षीय डॉक्टर हेमांग जोशी सबसे युवा सदस्य हैं।पार्टी की नई टीम में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव के साथ युवा चेहरों को जगह दिए जाने को संगठन में नई ऊर्जा लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब सातों प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति के बाद इन मोर्चों के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को और गति देने की जिम्मेदारी इन नेताओं पर होगी।