×

बिपिन रावत: कभी स्वीमिंग पूल में छलांग न लगा पाने पर मिली थी 'सजा', फिर लिखी देश के पहले सीडीएस बनने की इबारत

 

नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालने तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन यह सफर तय किया एक ऐसे सैनिक ने, जिसकी रगों में फौज का जुनून विरासत में था। बात हो रही है कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की। उनके फैसले, साहस और रणनीति ने सीमापार ऑपरेशनों से लेकर सैन्य सुधारों तक भारत की रक्षा नीति को नई दिशा दी।

16 मार्च 1958 में बिपिन रावत का जन्म फौजियों के परिवार में ही हुआ। उनके दादा सेना में थे, पिता लेफ्टिनेंट जनरल थे और चाचा फौज में हवलदार रिटायर हुए। दिलचस्प है कि जिस बटालियन में उनके पिता की पहली पोस्टिंग हुई थी, उसी बटालियन में बिपिन रावत को जाने का मौका मिला। 1978 में वे आईएमए से पासआउट हुए और 16 दिसंबर 1978 को भारतीय सैन्य अकेडमी देहरादून से 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में इन्हें नियुक्ति मिली।

सेना से जुड़ने का उनका किस्सा भी बड़ा मजेदार है। एनडीए के इंटरव्यू से जुड़ा वह किस्सा है, जब बिपिन रावत के सामने ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी बैठे हुए थे। उन्होंने रावत से सवाल किया था कि उनकी हॉबी क्या है। रावत ने उन्हें बताया कि वे ट्रैकिंग करना पसंद करते हैं। इंटरव्यू ले रहे अधिकारी ने रावत से कहा कि अगर आपको ट्रैकिंग पर भेजें तो आप अपने साथ एक कौन सी चीज ले जाना चाहेंगे। इस पर रावत ने कहा कि माचिस ले जाना चाहेंगे। उन्होंने कारण बताया कि माचिस की डिब्बी ट्रैकिंग के दौरान उनका काम बहुत आसान बना देगी। रावत के इस जवाब से इंटरव्यू ले रहे अधिकारी बहुत प्रभावित हुए थे। कई समाचार लेखों में इसका जिक्र मिलता है।

उन्हें यहां 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' से भी सम्मानित किया गया। 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' अकेडमी के सबसे काबिल कैडेट को दिया जाता है। उनकी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि जब एनडीए की ट्रेनिंग के दौरान कैडेट बिपिन रावत को स्वीमिंग पूल में छलांग का टास्क दिया गया था, तो वह टास्क पूरा नहीं कर पाए।

नतीजन सजा के तौर पर बिपिन रावत से छह महीने की सीनियॉरिटी छीन ली गई, हालांकि किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि स्वीमिंग पूल में छलांग न लगाने पाने वाला यह लड़का आगे चलकर न सिर्फ आईएमए में 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' हासिल करेगा, बल्कि वह भारत का सेनाध्यक्ष और फिर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) भी बनेगा। स्वीमिंग पूल से जुड़े इस किस्से का जिक्र रचना बिष्ट रावत ने जनरल बिपिन रावत की जीवनी 'बिपिन-द मैन बिहाइंड द यूनिफॉर्म' में किया।

फौज में बिपिन रावत ने अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए। वे 1986 में एलएसी पर इंफेंट्री बटालियन के प्रमुख रहे। कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स के एक सेक्टर और 19 इन्फेंट्री डिविजन का नेतृत्व किया और उन्होंने 2008 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र की सेना का भी नेतृत्व किया।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "आतंकवादी अपनी रणनीति बदलते रहते हैं। हमको उनसे आगे चलकर कार्रवाई करनी होती है। अगर हम उनसे दो कदम आगे रहे तो हमें सफलता मिलती रहेगी।" आतंकी अभियानों में दो कदम आगे बढ़कर फैसला लेने वाले जनरल बिपिन रावत ही थे, जिन्होंने पूर्वोत्तर में पहले बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

बात जून 2015 की है, जब मणिपुर में हुए हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद 21 पैरा कमांडो के जवानों ने सीमा पार जाकर म्यांमार में आतंकवादियों को मार गिराया था। सीमा पार ऑपरेशन को अंजाम देने वाली 21 पैरा कमांडो तब थर्ड कॉप्स के अधीन थी, जिसके कमांडर बिपिन रावत थे।

इसके बाद उन्होंने कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ 'ऑपरेशन ऑल आउट' चलाया। वे सरहद के जवानों में ही नहीं, देश के हर मोर्चे पर नौजवानों में राष्ट्रप्रेम का जुनून पैदा करते थे। देश, देशवासियों की रक्षा के लिए, ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्र और आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन के विशेषज्ञ वे बिपिन रावत ही थे। वे जनरल रावत ही थे, जब उनकी प्लानिंग के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के ऊपर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की थी। भारतीय फौज ने हर बार सीमा पार जाकर देश के दुश्मनों को उनके नापाक हरकत का अंजाम सिखाना शुरू किया।

वे ऐसे राष्ट्र सेनानी थे, जिन्होंने आतंकवादी भेजने वाले पाकिस्तान को उसकी हर हरकत की दुर्गति हासिल करने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने एक बयान में कहा था, "उत्तरी सीमा से अगर कोई चुनौती मिलती है तो पाकिस्तान इसका फायदा उठा सकता है और मुश्किल खड़ी कर सकता है। पाकिस्तान के ऐसे किसी भी नापाक इरादे से निटपने के लिए हमने पर्याप्त कदम उठाए हैं और वो (पाकिस्तानी) मिशन में सफल नहीं होंगे।"

दिसंबर 2016 में उन्हें भारतीय सेना का प्रमुख बना दिया गया। देश में सैन्य सुधार में जनरल रावत की अहम भूमिका रही। सीडीसी बनने के बाद तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए 5 थिएटर कमांड की घोषणा हुई, जिसका रोडमैप जनरल रावत ने ही तैयार किया। इन्होंने सेना में बजट का रेशनलाइजेशन किया मतलब खर्च प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। इनके नेतृत्व में सेना के नवीनीकरण पर काम काफी तेजी से चल रहा था। इनमें सबसे प्रमुख था फौज में डाउनसाइडिंग, मतलब सीमा पर स्टैंडिंग आर्मी को कम करके तकनीक से देश को सुरक्षा देने पर जोर देना।

भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी स्टैंडिंग आर्मी है। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाने का प्लान जनरल रावत ने ही दिया था। आईडीजी की तैनाती चीन-पाकिस्तान सीमा पर होनी थी। उन्होंने सरकार के सामने कई रैंक के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा था। जवानों के वेलफेयर के लिए जनरल रावत ने कम समय में ज्यादा काम किए। उनके सीडीएस बनने के बाद फौज में यूनिफॉर्म बदलाव की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी।

8 दिसंबर 2021 को पूरे हिंदुस्तान के लिए बुरी खबर आई। तमिलनाडु में कुन्नूर के निकट जनरल बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था, जिसमें उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारी भी सवार थे। इस दुर्घटना में बिपिन रावत समेत 13 लोगों का निधन हो गया।

--आईएएनएस

डीसीएच/वीसी