बिजेथुआ महाबीरन धाम : हनुमान जयंती पर विशेष कृपा पाने के लिए जरूर करें इस मंदिर में दर्शन
नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। 2 अप्रैल को देशभर में हनुमान जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। हनुमान जयंती के मौके पर देशभर के प्राचीन और सिद्धपीठ हनुमान मंदिरों में उत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
भक्त संकट से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की धरती पर ऐसा मंदिर है, जहां शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं?
उत्तर प्रदेश के जौनपुर-सुल्तानपुर जिले की सीमा पर सूरापुर के पास बिजेथुआ महाबीरन धाम स्थित है, जिसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। माना जाता है कि जब लक्ष्मण बाण लगने से मूर्छित हो गए थे, तब संजीवनी लेने गए हनुमान ने त्रेतायुग में इसी स्थान पर कालनेमि नामक राक्षस का वध किया था और विश्राम किया था। मंदिर के पास मकड़ी नाम का रहस्यमयी कुंड भी स्थित है। इस कुंड में स्नान करने से जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। भक्त हनुमान जी के दर्शन से पहले इस कुंड में स्नान करते हैं और पवित्र जल को अपने साथ घर भी लेकर आते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा स्वयंभू है। माना जाता है कि पुरातत्व विभाग ने खुदाई के जरिए प्रतिमा का ओर-छोर पता लगाने की कोशिश की थी, लेकिन खुदाई के दौरान हनुमान जी के दाहिने पैर का अंत नहीं मिला। विभाग के लोगों ने थक-हारकर खुदाई बंद कर दी। यही कारण है कि प्रतिमा को चमत्कारी माना जाता है। गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा के दर्शन करने के बाद भक्त परिक्रमा लगाते हैं और परिसर में मौजूद पेड़ पर घंटियां भी बांधते हैं।
मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भी भारी भीड़ मंदिर में देखने को मिलती है। भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में घंटी बांधकर जाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर हनुमान पाठ और अपनी श्रद्धा अनुसार दान करते हैं। हनुमान जयंती के मौके पर हर साल मंदिर में भव्य आयोजन होता है। मंदिर को फूलों और लाइटों से सजाया जाता है। मंदिर में हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी किया जाता है।
हनुमान जयंती के मौके पर मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में भी भक्तों के दर्शन के लिए खास तैयारियां की जाती हैं। अगर आप हनुमान जयंती के मौके पर बिजेथुआ महाबीरन धाम आ रहे हैं, तो पास स्थित धोपाप मंदिर जरूर जाएं। माना जाता है कि रावण के वध के बाद भगवान श्रीराम ने यहीं आकर अपने पापों का प्रायश्चित किया था।
--आईएएनएस
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