बिहार : रविशंकर प्रसाद ने सम्राट चौधरी से जमींदारी बांधों की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने की मांग की
पटना, 8 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पुनपुन और दरधा नदियों से जुड़े पुराने जमींदारी बांधों की तत्काल मरम्मत और उनकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से इन बांधों की समुचित मरम्मत नहीं होने के कारण वे कमजोर हो गए हैं और बाढ़ के दौरान कई जगहों पर टूटने से गांवों में पानी फैल रहा है। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि गंगा, दरधा और अन्य सहयोगी नदियों में आई बाढ़ के कारण वह पिछले कई दिनों से अपने क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर रहे हैं।
इस दौरान लोगों की समस्याओं को समझने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्परता से काम कर रहा है और उसका पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने पत्र में कहा कि क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पुनपुन नदी के पुराने जमींदारी बांधों की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। ये बांध काफी कमजोर हो गए हैं और उनकी ऊंचाई भी कम है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में वृद्धि के दौरान इन बांधों पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। कई स्थानों पर बांध टूटने से आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी फैल जाता है।
भाजपा सांसद ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए फतुहा और पुनपुन नदी से जुड़े क्षेत्रों में पुराने जमींदारी बांधों की मरम्मत कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बांधों की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत भी बताई। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी पत्र लिखा है।
इसके अलावा उन्होंने गौरीचक से अलावलपुर और जमुनापुर जाने वाले मार्ग की समस्या भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाई। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान यह रास्ता डूब जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। उन्होंने इस सड़क की ऊंचाई बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि बाढ़ की स्थिति में भी लोगों का आवागमन सुचारू रूप से जारी रह सके।
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