बिहार: पूर्व विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह बोले, इस्तीफे के पीछे कोई नाराजगी या राजनीति नहीं
पटना, 28 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद के पूर्व चेयरमैन अवधेश नारायण सिंह ने अपने इस्तीफे, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों, भाजपा नेतृत्व की भूमिका और भविष्य की राजनीति को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक विवाद या नाराजगी नहीं है। पार्टी नेतृत्व ने जो निर्णय लिया, उन्होंने उसे स्वीकार किया।
अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि वह दिल्ली गए हुए थे और वहां से लौटने के बाद संदेश मिला कि दोनों दलों के बीच फैसला हुआ है और विधान परिषद का चेयरमैन पद जदयू के खाते में गया है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के एक अनुशासित कार्यकर्ता हैं और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाना उनके संस्कार में नहीं है। जब नेतृत्व ने फैसला कर लिया तो इस्तीफा देना ही उचित था। इसके पीछे किसी तरह की राजनीति या नाराजगी नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिस दल में उन्होंने करीब 40 साल बिताए और जिस नेतृत्व पर विश्वास किया, उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का जिक्र करते हुए कहा कि नेतृत्व का आदेश मिलने के बाद उन्होंने उसे स्वीकार किया।
नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों पर अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उनके साथ शुरू से ही व्यक्तिगत और अच्छे संबंध रहे हैं। नीतीश कुमार ने उन पर विश्वास किया और उन्हें विधान परिषद के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी दी, जिसके लिए वह उनके आभारी हैं। नीतीश कुमार के स्वस्थ रहने की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि नीतीश कुमार आगे भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं।
अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि बिहार में इस तरह का नेतृत्व बार-बार पैदा हो, यही उनकी इच्छा है। साथ ही उन्होंने वर्तमान केंद्रीय नेतृत्व और बिहार में युवा नेतृत्व के उभरने को भी खुशी की बात बताया।
भविष्य में जदयू में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह इस विषय में नहीं हैं और राजनीतिक मामलों की गहराई में जाने से बचते हैं। वह पक्ष और विपक्ष सभी के साथ संबंध रखते हैं और सभी का सम्मान करते हैं। राजनीति में उनका प्रयास हमेशा सभी को साथ लेकर चलने का रहा है।
अपने कार्यकाल और विधान परिषद के चेयरमैन पद को लेकर अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि सदन का सदस्य बनकर पहुंचना ही उनके लिए बहुत बड़े गर्व की बात है। पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन चुनाव जीतकर सदन में पहुंचना मतदाताओं के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं, समर्थकों और सहयोगियों को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि अगर मतदाताओं ने उन्हें सदन में नहीं भेजा होता तो वह मंत्री या सभापति नहीं बन पाते। मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि उनके इस विश्वास का ऋण वह जीवनभर नहीं चुका सकते।
अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि इस्तीफे के बाद उन्हें बड़ी संख्या में लोगों के फोन आए और कई लोग दुखी थे, लेकिन वह स्वयं इसे लेकर दुखी नहीं हैं। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके क्षेत्र के मतदाताओं का वोट और सम्मान विधान परिषद में पहुंचा। अगर वह दोबारा चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उन्हें फिर से जीतकर आने का पूरा विश्वास है। उन्होंने इसके लिए अपने मतदाताओं, समर्थकों, भाजपा और गठबंधन के सहयोग को श्रेय दिया।
अवधेश नारायण सिंह ने आगे कहा कि वह पार्टी के सिपाही हैं और पार्टी में रहना उनके लिए गर्व की बात है। नेतृत्व की अवहेलना करना उनके संस्कार में नहीं है। शीर्ष स्तर पर जब कोई फैसला हो जाता है तो उसके बाद उस पर सवाल उठाने की गुंजाइश नहीं रहती। लंबे समय से पार्टी में रहने के दौरान उन्होंने संगठन और सरकार के स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं और उन्हें किसी तरह की शिकायत नहीं है। नेतृत्व का फैसला स्वीकार करना ही एक अनुशासित कार्यकर्ता का कर्तव्य है।
--आईएएनएस
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