बिहार : निर्दलीय एमएलसी के भाजपा में शामिल होने पर नीरज कुमार बोले-'शरीर कहीं, आत्मा कहीं, दिमाग कहीं'
पटना, 1 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने और दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर जदयू के प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने रविवार को कहा कि निर्दलीय विधान पार्षदों का किसी दल की सदस्यता लेने का निर्णय उनके विवेक का सवाल है। वहीं, चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए जदयू पांच नवंबर को बैठक करेगी।
नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को जितनी उम्मीद थी, उसके हिसाब से उपलब्धि नहीं मिली। इसके बावजूद अगर कोई निर्दलीय विधान पार्षद किसी दल की सदस्यता लेना चाहता है और वह ऐसा करता है, तो यह उसके विवेक का मामला है। उन्होंने कहा कि जदयू पांच नवंबर को चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी।
उन्होंने कहा कि इस बैठक में उन सभी सीटों पर चर्चा होगी, जहां पार्टी के उम्मीदवार जीते या हारे हैं। पार्टी यह भी जानने का प्रयास करेगी कि स्थानीय स्तर पर आखिर क्या परिस्थितियां रहीं और परिणाम उम्मीद के अनुरूप क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्कूलों, रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में कई काम किए हैं। कुशल युवा योजना के तहत युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई 10 रुपये में, पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पांच रुपये महीने में और नर्सिंग की पढ़ाई मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को दो हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है। ऐसे में यह समझने की जरूरत है कि आखिर कमी कहां रह गई।
नीरज कुमार ने कहा कि पांच नवंबर की बैठक में जीते और हारे हुए उम्मीदवारों, विधान पार्षदों, प्रभारियों तथा अन्य संबंधित लोगों को बुलाया गया है। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, निशांत कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से जदयू को झटका लगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि झटका किस बात का है, यह प्रमाणित करना होगा।
उन्होंने कहा, "शरीर कहीं, आत्मा कहीं, दिमाग कहीं- यह राजनीति में एक नया प्रचलन शुरू हुआ है।" उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी ने भी ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत बात पांच नवंबर की बैठक में रखी जाएगी। विधान परिषद के सभापति रामबचन राय की भूमिका पर उन्होंने कहा कि सभापति का पद दलीय नहीं होता और पद संभालने के बाद उनकी भूमिका बदल जाती है। निर्दलीय सदस्य के किसी राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर संविधान की दसवीं अनुसूची में क्या प्रावधान है, यह विधिवेत्ता ही बता सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सभापति के पास आवेदन आने पर वे विधिवेत्ताओं से सलाह लेकर संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेंगे। नीरज कुमार ने कहा कि जदयू ने निशांत कुमार को पार्टी की कमान सौंपी है। ऐसे में निशांत कुमार को राजनीतिक रूप से ताकत देना पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का धर्म है।
वहीं, बिहार स्नातक शिक्षक चुनाव परिणाम के बाद राजद सांसद मनोज झा की प्रतिक्रिया सामने आई है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "पिछले दिनों दो निर्दलीय उम्मीदवार चुने गए। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे। अब दोनों निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। हाथ में पर्ची लेकर इसका प्रदर्शन भी किया गया। एक हाई-ऑक्टेन चुनाव संपन्न हुआ।"
--आईएएनएस
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