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बिहार में कानून-व्यवस्था खत्म, अपराधियों को मिल रहा सरकार का संरक्षण: तेजस्वी यादव

 

पटना, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य में बढ़ते अपराध और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा पर जुबानी हमला किया। उन्होंने सीतामढ़ी में जिला परिषद प्रतिनिधि की हत्या और जहानाबाद के एक अस्पताल में पैर टूटे मरीज को कथित तौर पर प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड पैड लगाए जाने का मामला उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

तेजस्वी यादव ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान सीतामढ़ी में जिला परिषद प्रतिनिधि की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में अपराध की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। बिहार में ऐसा कोई दिन नहीं है जब अपराध की घटना सामने न आती हो। हत्या, बलात्कार, रंगदारी और अपहरण जैसी घटनाओं के साथ पुलिसिया अपराध के मामले भी बढ़े हैं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और अपराधियों का बोलबाला है। अपराधियों को सरकार से संरक्षण मिल रहा है और उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही।

उन्होंने कहा कि निर्दोष और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है। तेजस्वी यादव ने इसके लिए मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सरकार को पीड़ित परिवारों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि गंभीर घटनाओं के बाद सरकार के शीर्ष जिम्मेदार लोगों को पीड़ित परिवारों से मिलना चाहिए। सरकार जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय केवल बयानबाजी कर रही है। लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाएं राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और सरकार को अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जहानाबाद के एक अस्पताल से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पैर टूटने के बाद एक मरीज को कथित तौर पर सही प्लास्टर लगाने के बजाय कार्डबोर्ड का पैड लगा दिया गया। इस मामले को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और बिहार सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अस्पतालों में मरीजों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।

तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार के पास मरीज के पैर का प्लास्टर कराने तक के संसाधन नहीं बचे हैं। इस मामले का संज्ञान लिया जाना चाहिए और यह जांच होनी चाहिए कि अस्पताल में ऐसी स्थिति क्यों बनी। इस तरह की तस्वीरें पूरे देश में जा रही है और बिहार की बदनामी हो रही है।

--आईएएनएल

पीएसके