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बिहार: इंडो-नेपाल बॉर्डर परियोजना में 529 किलोमीटर सड़क बनकर तैयार

 

पटना, 17 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार में भारत-नेपाल सीमा से सटे सात जिलों को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना का कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना के अंतर्गत 95 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

बिहार में पश्चिम चंपारण के मदनपुर से शुरू होकर किशनगंज के गलगलिया तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण केंद्रीय परियोजना का निर्माण करीब 5865 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। मई महीने तक परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्य है।

पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति की जानकारी ली एवं शेष कार्यों में आ रहे अवरोधों को दूर करने के लिए आवश्यक निदेश दिए।

इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना के तहत बिहार में लगभग 554 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाना है, जिसमें से अब तक 529 किलोमीटर से अधिक निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है।

बैठक में सचिव ने पूर्वी चम्पारण जिले में परियोजना के निर्माण में आ रही भू-अर्जन सहित अन्य बाधाओं को भी दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। परियोजना के तहत अब तक 808 पुलिया एवं 129 पुलों का निर्माण किया जा चुका है। शेष पुलिया एवं पुलों के स्ट्रक्चर का कार्य किया जा रहा है।

यह सड़क पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों को आपस में जोड़ेगी। माना जाता है कि इसके बन जाने से सीमावर्ती क्षेत्र के लाखों लोगों को व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि उत्पादों के निर्बाध आवागमन के लिए एक सुगम, सुरक्षित और सीधा संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा बल की चौकियों को सड़क मार्ग से जोड़ना और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करना है। सचिव ने कहा कि यह सड़क सीमा सुरक्षा बल की चौकियों तक तेज और सुगम पहुंच सुनिश्चित करेगी। साथ ही सीमावर्ती गांवों में भी परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

--आईएएनएस

एमएनपी/एएसएच