बिहार: 'जेनजी राइजिंग’ में युवाओं के सवालों पर सरकार को घेरा, नेहा ने बीपीएससी 70वीं और दारोगा भर्ती परीक्षा की अनियमितताओं पर मांगा जवाब
पटना, 6 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना में रविवार को आइसा और आरवाईए के संयुक्त तत्वावधान में ‘जेनजी राइजिंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकार, पुलिस दमन और आंदोलनों से जुड़े सवालों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम को भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने संबोधित किया। कार्यक्रम को चार सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र ‘जुल्म फिर जुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है’ में पुलिस दमन और आंदोलनों से जुड़े अनुभव साझा किए गए। इस दौरान विशाल, आरिफ, सबा और नवीन ने अपने अनुभव सामने रखे। दूसरे सत्र ‘आंदोलन की आवाज’ में छात्र-युवा आंदोलनों और उनके संघर्षों पर चर्चा हुई।
पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि सरकार से पूछा जाना चाहिए कि ऐसी कौन-सी पढ़ाई चल रही है, जिसमें छठी कक्षा के बच्चे दूसरी कक्षा की किताब तक नहीं पढ़ पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा का बजट कम किया गया है और कई विद्यालयों के पास पर्याप्त भवन तक नहीं हैं।
आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कहा कि बिहार के छात्र-नौजवान लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने के बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है। झारखंड आंदोलन की नेता हबीबा ने भी बिहार के छात्र-युवा आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बिहार की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को बिहार के लोगों ने ताकत दी। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और उनके परिवारों को दमन का सामना करना पड़ा। नेहा ने बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में कथित धांधली और दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली हर अनियमितता का हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया में मताधिकार और नागरिकता से जुड़े सवालों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि ‘जेनजी’ केवल एक पीढ़ी का नाम नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और अपने अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन को बिहार में व्यापक जनआंदोलन बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। स्कूलों में आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की बात करने वाले लोग ‘वन नेशन, वन एजुकेशन सिस्टम’ की बात क्यों नहीं करते। कॉमन स्कूल सिस्टम की लड़ाई छात्र-युवा लड़ेंगे।
दीपंकर भट्टाचार्य ने जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मुकदमों की वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि अगर जंतर-मंतर आंदोलन के मुकदमे वापस हो सकते हैं तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े मुकदमे भी वापस होने चाहिए। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में व्यंग्यकार एवं प्रोफेसर डॉ. मेडुसा ने युवाओं से सोशल मीडिया पर सही सूचनाओं को प्रसारित करने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर छात्र-युवा एकजुटता को मजबूत करने का आह्वान किया।
--आईएएनएस
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