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बिहार : आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग पर तेजस्वी घिरे, संतोष सुमन बोले-दलितों को ज्ञान नहीं, हिसाब दीजिए

 

पटना, 2 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण की समीक्षा और ‘कोटे में कोटा’ के मुद्दे को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जैसे ही आरक्षण की समीक्षा और ‘कोटे में कोटा’ की बात आती है, कुछ लोग हंगामा शुरू कर देते हैं कि “आरक्षण खत्म हो जाएगा।”

संतोष सुमन ने कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण समाप्त करने या किसी का अधिकार छीनने की बात नहीं कर रही है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का वास्तविक लाभ समाज के सबसे वंचित तबके तक पहुंचे। उन्होंने दलित आरक्षण के भीतर सबसे वंचित समुदायों के लिए ‘कोटे में कोटा’ की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सवाल उठना चाहिए कि आरक्षण का लाभ किन जातियों, परिवारों और सामाजिक तबकों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने मांझी, डोम, नट, हलखोर समेत अन्य अत्यंत वंचित समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि ये समुदाय आज भी अपने उचित हिस्से और वास्तविक भागीदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सुमन ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि दलितों को ज्ञान देने से पहले उन्हें अपने माता-पिता के 15 वर्षों के शासन और अपनी राजनीति का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि उस दौर में दलितों की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई गई।

उन्होंने कहा कि आरक्षित सीटों पर दलित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर संविधान और आरक्षण की व्यवस्था के कारण मिलता है, इसे किसी राजनीतिक दल या परिवार की कृपा नहीं बताया जा सकता। सुमन ने तेजस्वी से पूछा कि सामान्य सीटों पर कितने दलितों को टिकट दिया गया, यादव बहुल क्षेत्रों से कितने दलित उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा गया और विधान परिषद तथा राज्यसभा में सबसे वंचित दलित समुदायों को कितना प्रतिनिधित्व मिला।

उन्होंने कहा कि दलितों को केवल वोट बैंक के रूप में देखना आसान है लेकिन दलित नेतृत्व को मजबूत करना वास्तविक सामाजिक न्याय की कसौटी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना नहीं, बल्कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। उन्होंने बिहार में सामाजिक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के योगदान का भी उल्लेख किया।

सुमन ने कहा कि असली सामाजिक न्याय तभी होगा, जब दलितों को सामान्य सीटों से भी चुनाव लड़ने का अवसर मिले और उन्हें विधान परिषद, राज्यसभा, मंत्रिमंडल तथा संगठन में निर्णय लेने की बराबर भागीदारी मिले। उन्होंने दोहराया कि आरक्षण रहेगा, मजबूत रहेगा और सबसे वंचितों के लिए ‘कोटे में कोटा’ सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास जारी रहेगा।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम