RTI से बड़ा खुलासा: दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से की थी EC अफसर की शिकायत, नहीं हुई कोई कार्रवाई
चुनाव आयोग के अधिकारी मनीष गर्ग के कामकाज और उनके द्वारा जारी आदेशों को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर शिकायत की थी। हालांकि, इन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
RTI के जवाब में बताया गया कि कैबिनेट सचिवालय ने इन पत्रों को चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक शिकायत के रूप में नहीं माना। सचिवालय का विचार था कि इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे एक संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप का सवाल उठ सकता था।
यह जानकारी RTI कार्यकर्ता लोकेश के. बत्रा को उपलब्ध कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष गर्ग पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना ऐसा आदेश जारी किया, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कामकाज का बंटवारा प्रभावित हुआ। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और आधिकारिक पक्षों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने पलटा था आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मनीष गर्ग के कामकाज के बंटवारे से जुड़े आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही निर्देश दिया गया था कि आयोग में बदलाव को लेकर सहमति बनने तक पहले से लागू व्यवस्था जारी रहेगी।
इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग के भीतर प्रशासनिक अधिकारों, फैसले लेने की प्रक्रिया और अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए थे। RTI से मिली जानकारी के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
2024 में चुनाव आयोग में नियुक्त हुए थे मनीष गर्ग
मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को अपना पदभार संभाला था।
इससे पहले गर्ग हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में काम कर चुके थे। चुनाव आयोग में उनकी भूमिका प्रशासनिक और तकनीकी कामकाज से जुड़े विभिन्न मामलों में महत्वपूर्ण रही है।
मतदाता सूची के IT सिस्टम को लेकर भी उठे थे सवाल
मनीष गर्ग का नाम इससे पहले मतदाता सूची से जुड़े IT सिस्टम ERONet के संचालन और निर्वाचन अधिकारियों को मिलने वाली पहुंच को लेकर हुए विवाद में भी सामने आया था।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर पर निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था। इससे मतदाता सूची से जुड़े उनके कानूनी और आधिकारिक काम प्रभावित होने की आशंका थी।
इस विवाद में मुख्य सवाल यह था कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन जैसे कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी डिजिटल जानकारी और सिस्टम तक पर्याप्त पहुंच मिल रही थी या नहीं।
10 महीने में 14 बार आपत्ति जताने की रिपोर्ट
25 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण, अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध कराने और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इसके बाद 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा था कि मनीष गर्ग के कामकाज के बंटवारे से जुड़ा आदेश लागू नहीं किया गया था। आयोग ने यह भी कहा था कि IT विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी।
3 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी मनीष गर्ग की भूमिका और चुनाव आयोग के IT सिस्टम से संबंधित कामकाज पर सवाल उठाए थे।
21 अक्टूबर को RTI से जुड़ी जानकारी आई सामने
21 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से भेजे गए पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और उन्हें आगे संबंधित अधिकारियों तक भेजा गया था। हालांकि, उस समय पत्रों में दर्ज शिकायतों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ था।
अब RTI के जवाब में यह बात सामने आई है कि कैबिनेट सचिवालय ने इन पत्रों को चुनाव आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं माना और इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं समझा।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर सामने आए इस मामले ने चुनाव आयोग के भीतर प्रशासनिक फैसलों, IT सिस्टम पर नियंत्रण और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की ओर से शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है, वहीं दूसरी तरफ कैबिनेट सचिवालय ने संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप की आशंका के चलते कार्रवाई से दूरी बनाए रखने की बात कही है।