विदेशी चंदे के नियमों में बड़ा बदलाव! JPC की पहली बैठक के बाद हलचल तेज, शीतकालीन सत्र तक देनी होगी रिपोर्ट
विदेशी चंदे की निगरानी और उसके इस्तेमाल से जुड़े FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC की पहली बैठक शुक्रवार, 18 सितंबर को नई दिल्ली में हुई। बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रस्तावित कानून के प्रावधानों की जानकारी दी। 31 सदस्यीय JPC की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं।
Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त को दोनों सदनों की मंजूरी के बाद इसे विस्तृत जांच के लिए JPC के पास भेज दिया गया। समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करनी है।
विपक्ष ने लगाए अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के आरोप
बिल को लेकर विपक्ष और कुछ धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने आपत्तियां जताई हैं। उनका आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधान विदेशी फंड हासिल करने वाले कुछ NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। कुछ संगठनों ने विशेष रूप से ईसाई संस्थाओं पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
वहीं, सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य विदेशी चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना है। गृह मंत्रालय ने इसे विदेशी फंड के इस्तेमाल और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन में मौजूद कानूनी कमियों को दूर करने वाला कदम बताया है।
25 मार्च को लोकसभा में पेश हुआ था बिल
FCRA संशोधन विधेयक 2026 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया था। इसके तहत Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
बिल का सबसे अहम प्रस्ताव उन संस्थाओं से जुड़ा है जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है, रद्द हो जाता है या संस्था खुद अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर देती है। ऐसे मामलों में विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए एक Designated Authority बनाने का प्रस्ताव है।
FCRA बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
1. विदेशी फंड से जुड़ी संपत्तियों की निगरानी
अगर किसी संस्था का FCRA सर्टिफिकेट रद्द हो जाता है, संस्था उसे सरेंडर कर देती है या उसका रजिस्ट्रेशन समाप्त हो जाता है, तो विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों को लेकर सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी की भूमिका तय की जाएगी।
इस अथॉरिटी को ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा, निगरानी, प्रबंधन और कुछ परिस्थितियों में उनके निपटारे से जुड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। धार्मिक स्थल होने की स्थिति में उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।
2. विदेशी चंदे के इस्तेमाल पर ज्यादा निगरानी
सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। FCRA के तहत विदेशी फंड हासिल करने वाले संगठनों को पहले से ही तय नियमों के अनुसार उसका इस्तेमाल करना होता है।
2026 में जारी संशोधित FCRA Rules में भी संस्थाओं की गतिविधियों और अनुपालन से जुड़े कुछ नियमों को स्पष्ट किया गया है।
3. रजिस्ट्रेशन खत्म होने पर संपत्तियों का क्या होगा, इसका ढांचा
मौजूदा कानून में विदेशी चंदे से जुड़ी संपत्तियों के निहित होने का प्रावधान मौजूद है, लेकिन उनके कब्जे, प्रबंधन और निपटारे की विस्तृत प्रक्रिया को लेकर बिल में नया ढांचा प्रस्तावित किया गया है।
यही प्रावधान इस संशोधन विधेयक के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है और JPC इसकी विस्तार से जांच करेगी।
31 सदस्यीय है JPC
FCRA संशोधन बिल की जांच के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। इसमें सत्ता पक्ष के साथ-साथ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, DMK, NCP-SP, IUML, TDP, JD(U), शिवसेना और अन्य दलों के सांसद भी शामिल हैं।
समिति में प्रमुख नामों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे, ए. राजा, सुप्रिया सुले, कल्याण बनर्जी, एंटो एंटनी, कप्तान विरियाटो फर्नांडीस, हर्षवर्धन श्रृंगला, प्रफुल्ल पटेल और संजय कुमार झा शामिल हैं।
JPC अब क्या करेगी?
संयुक्त संसदीय समिति का काम बिल के प्रावधानों की विस्तृत जांच करना, संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों से जानकारी लेना और जरूरत पड़ने पर सुझावों के आधार पर बदलाव की सिफारिश करना है।
पहली बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों से बिल की जानकारी ली गई। आने वाले समय में समिति विभिन्न पक्षों की राय और बिल के संभावित प्रभावों पर चर्चा कर सकती है।
फिलहाल FCRA संशोधन बिल संसद से पास नहीं हुआ है। यह JPC के पास जांच के लिए लंबित है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।