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भोजशाला विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती

 

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। धार की भोजशाला को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुस्लिम पक्ष ने अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 16 मार्च के आदेश को चुनौती दी है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि विवादित स्थल का वास्तविक धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की जाएगी। साथ ही, कोर्ट ने खुद मौके का निरीक्षण करने का भी फैसला लिया था, जिसे लेकर अब मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उन्हें एएसआई (पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) की रिपोर्ट पर अपने ऐतराज दर्ज करने का पूरा मौका नहीं दिया गया। उनका मानना है कि उनकी बात पूरी तरह सुने बिना आगे की कार्रवाई करना सही नहीं है। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 1 अप्रैल को सुनवाई होनी है।

वहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जजों ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शनिवार को खुद जाकर स्थल का निरीक्षण भी किया था। इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी धार पहुंचे और करीब 55 मिनट तक भोजशाला परिसर का जायजा लिया। यह निरीक्षण काफी अहम माना जा रहा है।

इस विवाद की जड़ काफी पुरानी है। हिंदू समुदाय इस जगह को मां वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यही वजह है कि यह मामला सालों से चला आ रहा है और अभी तक इसका कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।

अब 2 अप्रैल की तारीख बहुत अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी दिन से हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू होनी है। खास बात यह भी है कि उसी दिन हनुमान जयंती भी है। वहीं, इससे पहले एक अप्रैल को सुप्रीम को कोर्ट में सुनवाई होनी है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम