भोजशाला फैसले पर मुस्लिम संगठनों में मायूसी, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
भोपाल, 15 मई (आईएएनएस)। धार भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद समेत कई मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं ने कहा है कि इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। वहीं, कुछ मुस्लिम संगठनों ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करने और कानूनी रास्ता अपनाने की अपील भी की है।
आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यह मामला बहुत पुराना है और काफी समय से इस पर विवाद चल रहा था। जब से यह एएसआई के हाथ में गया है, तब से ही विवाद चल रहा है। आज हाई कोर्ट का एक फैसला आया है, जिसने एएसआई को आधार मानकर दूसरे पक्ष को दे दिया है।
उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे। हम भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, हमारे पास मौका है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आने तक प्रशासन को इसे किसी और को नहीं सौंपना चाहिए। मुस्लिम समुदाय सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा दिल दिखा चुका है।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समुदाय के लोगों में मायूसी पैदा हुई है। लेकिन, हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता है। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। कोर्ट के फैसले की हम सभी इज्जत करते हैं।
भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ये विवाद बहुत पुराना है। देश के मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि वहां जुमे के दिन ही नमाज होती है और मंगलवार को पूजा होती थी। जुमे के दिन मूर्तियां हटाकर सफाई करके नमाज होती थी।
उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान विवादित जगह पर नमाज नहीं पढ़ेगा। लड़ाई लड़ी जा रही थी। कोर्ट का फैसला आ गया है। बाबरी मस्जिद फैसले की तरह हमें इसे भी अपनाना चाहिए। कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। देश के मुसलमानों से अपील है कि राजनीतिक लोगों के बहकावे में न आएं। अगर कोई कार्रवाई करनी है तो सुप्रीम कोर्ट जाएं।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम