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'भारती-नारी से नारायणी' कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज

 

नई दिल्ली, 8 मार्च (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 'भारती-नारी से नारायणी' कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर की गूंज सुनाई पड़ी। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने वाली बीएसएफ महिला कॉन्स्टेबलों को सम्मानित किया गया। इस दौरान महिला कांस्टेबलों ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जो उन्हें सम्मान मिला है, उसे वह अपने देश और वरिष्ठ अधिकारियों को समर्पित करते हैं।

बीएसएफ कांस्टेबल कमला ने बताया कि आज के कार्यक्रम में मुझे अपने अनुभव को साझा करने का मौका मिला है, और मैं खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली मानती हूं।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बीएसएफ कांस्टेबल ने कहा कि बॉर्डर पर हालात बहुत तनावपूर्ण थे। मुझे मेरे परिवार के साथ बटालियन हेडक्वार्टर जाने के निर्देश मिले थे, लेकिन उससे हटकर मैंने अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता दी। मैंने अपने बच्चों को ससुराल भेजा और बिना किसी देरी के अपने सीनियर को रिपोर्ट किया। ऐसी कठिन परिस्थिति में एक मां का दिल जरूर भावुक था, लेकिन एक जवान का हौसला बहुत मजबूत था। उन्होंने कहा कि 10 मई 2025 को हमें निर्देश मिला था कि हम सभी जवानों को दुश्मन देश की हर गतिविधि पर नजर रखनी है। हमारे द्वारा समय पर दी गई जानकारी के आधार पर दुश्मन के बंकर को ध्वस्त किया जा सका।

उन्होंने कहा कि उस दौरान हालात बहुत तनावपूर्ण थे। ऐसे समय में भी हम जवानों ने पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी निभाई। सच मानिए, फायरिंग के दौरान एक पल के लिए हमें अपने परिवार का ख्याल नहीं आया है। दिल और दिमाग में एक चीज थी कि दुश्मन को अच्छे से सबक दिखाना है। उन्होंने कहा कि आज इस खास मौके पर मैं यह कहना चाहती हूं कि महिलाएं हर भूमिका निभा सकती हैं, चाहे परिवार को संभालने की बात हो या फिर देश की सुरक्षा की बात हो। जय हिंद।

काजल ने कहा कि दो साल की ट्रेनिंग के बाद मुझे ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने का मौका मिला। इस दौरान मैं भारत-पाकिस्तान बॉर्डर, जम्मू में मौजूद थी। हम लोगों को निर्देश दिया गया था कि हम पाकिस्तान की गतिविधि पर ध्यान रखें और रिपोर्ट करें। हालांकि, उस दौरान पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी की गई, लेकिन हम भी डट कर खड़े थे और पाकिस्तान की साजिशों को नाकाम किया। आज इस कार्यक्रम में हमें जो सम्मान मिला है, उसके लिए मैं अपनी टीम को धन्यवाद देती हूं।

एक अन्य महिला बीएसएफ कांस्टेबल ने कहा कि साहस और हौसला हो तो महिलाएं हर चुनौती का सामना कर सकती हैं।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीएससी