भारतीय शूटिंग के दबदबे में जसपाल राणा की अहम भूमिका रही: अवनि लेखरा
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा ने दिग्गज शूटर (निशानेबाज) और कोच रहे जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। अवनि ने कहा कि वह एक ऐसे इंसान के जाने से बहुत दुखी हैं, जिसने भारतीय शूटिंग में अहम भूमिका निभाई।
अवनि लेखरा ने एक्स पर लिखा, "जसपाल राणा सर के निधन से बहुत दुखी हूं। एक जाने-माने एथलीट और कोच, दोनों के तौर पर, शूटिंग के खेल में हमारे देश का दबदबा बनाने में उनका अहम रोल रहा है। उनके परिवार, करीबी लोगों और पूरी भारतीय शूटिंग बिरादरी के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।"
राणा का निधन शुक्रवार को नई दिल्ली में दिल से जुड़ी बीमारी के कारण हो गया। वह 49 साल के थे। मुनिक में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटने के ठीक बाद राणा का निधन हो गया। टूर्नामेंट में भारत ने चार पदक जीते थे।
उनके पार्थिव शरीर को देहरादून में उनके घर पर परिवार के सदस्यों, दोस्तों, साथी एथलीटों और प्रशंसकों के पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए रखा गया था।
भारत के सबसे मशहूर निशानेबाजों में से एक, राणा एक एथलीट और कोच दोनों के तौर पर एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं।
28 जून 1976 को उत्तराखंड में जन्मे राणा ने 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ जूनियर वर्ल्ड खिताब जीतकर दुनिया में अपनी पहचान बनाई। दो साल बाद, उन्होंने अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीते, जिसमें 1994 और 2006 के बीच चार संस्करणों में नौ स्वर्ण पदक शामिल थे। उन्होंने आठ एशियन गेम्स पदक भी जीते, जिनमें से चार स्वर्ण पदक थे। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार के बावजूद उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते थे।
निशानेबाजी से संन्यास के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की ओर रुख किया। उनकी कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते थे और एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनी थीं। जसपाल राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1997 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया था।
--आईएएनएस
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