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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वत: संज्ञान लेने की अपील

 

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। बिहार पुलिस की ओर से भोजपुर में किए गए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील निशांत वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है। उनकी ओर से एनएचआरसी से स्वतः संज्ञान लेकर बिहार सरकार, राज्य सरकार के डीजीपी और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगने की अपील की गई है।

वकील निशांत वर्मा की ओर से शिकायत पत्र में लिखा गया है कि यह बताया जा रहा है कि 17 जून को भोजपुर जिले (आरा कमिश्नरेट) में बिहार पुलिस की ओर से एक एनकाउंटर किया गया। 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया और अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए जन-मुद्दे उठाने के लिए स्थानीय स्तर पर जाने जाते थे। ग्रामीणों ने उन्हें एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बताया, जो गरीब परिवारों, बाढ़ पीड़ितों और विस्थापित समुदायों की समस्याओं को उजागर करते थे।

शिकायत में लिखा गया कि समाचार रिपोर्टों के अनुसार, एनकाउंटर से एक दिन पहले भरत भूषण तिवारी फेसबुक लाइव पर आए थे। 17 जून की सुबह, पुलिस ने उनके घर को घेर लिया था और जब भरत घर से बाहर आकर पुलिस से बात करने लगे, तो कुछ आश्वासन मिलने पर उन्होंने अपनी पिस्तौल फेंक दी थी। इसके बावजूद, पुलिस की ओर से भरत तिवारी के पैरों में 3-4 गोलियां मारी गईं और एक गोली उनके पेट में मार दी गई। इसके बाद जब उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया जा रहा था, तो पटना पहुंचने पर उनकी मौत हो गई।

वकील निशांत वर्मा की ओर से शिकायत पत्र में लिखा गया कि मृतक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वह एक भ्रष्ट सिस्टम का शिकार थे और बेसहारा लोगों और बाढ़ पीड़ितों के हक के लिए लड़ रहे थे। उन्हें हिरासत में लिया जा सकता था, और एक मां के बेटे की इस एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल हत्या (बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या) को रोका जा सकता था।

पत्र में आगे कहा गया है कि निवेदन है कि सुप्रीम कोर्ट ने 'पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014) 10 एसीसी 635' मामले में पुलिस एनकाउंटर की जांच के लिए विस्तृत गाइडलाइंस दी थीं।

पत्र में लिखा गया कि इस मामले में तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में 'विशाल तिवारी बनाम भारत संघ' के नाम से एक पीआईएल दायर की गई है, जिसमें जज ने वकील से रजिस्ट्रार के समक्ष मामले का उल्लेख (मेंशन) करने को कहा था। यह मामला अभी तक लिस्ट नहीं हुआ है।

पत्र में लिखा गया कि आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 17 के तहत समानांतर रूप से स्वत: संज्ञान ले सकता है, जहां सरकारी तंत्र कानून के शासन का उल्लंघन करते हुए मनमाने ढंग से कार्य करता है, किसी व्यक्ति के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है, किसी व्यक्ति की हत्या करता है।

शिकायत पत्र में मांग की गई है कि बिहार राज्य पुलिस की ओर से युवक की इस घृणित, भयानक और न्यायेतर हत्या के मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 17 के तहत स्वत: संज्ञान लें और बिहार के पुलिस महानिदेशक, एडीजी, आरा डिवीजन और जिला भोजपुर के एसपी से रिपोर्ट मांगी जाए।

--आईएएनएस

एसडी/