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भारत राजनीति से नहीं, एकता के धर्म से जुड़ा है : सुनील आंबेकर

 

कानपुर, 25 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद में युवाओं ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, एआई, शिक्षा-रोजगार, महिला सुरक्षा, सोशल मीडिया और राष्ट्र निर्माण जैसे समसामयिक मुद्दों पर सवाल उठाए।

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत केवल राजनीति से नहीं, बल्कि एकता के धर्म से जुड़ा हुआ है। उन्होंने युवाओं से बदलती तकनीक के दौर में अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित संवाद में आंबेकर ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, लेकिन यह स्वतंत्रता तब सार्थक है, जब वह दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान में बाधा न बने। भारतीय सांस्कृतिक मूल्य स्वतंत्रता को रोकते नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, त्याग, समर्पण और सेवा के जरिए सामाजिक सामंजस्य कायम करते हैं।

एआई और भविष्य की नौकरियों से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी मुख्य पढ़ाई के साथ दो-चार अतिरिक्त कौशल जरूर सीखने चाहिए। एआई और कंप्यूटर जैसी आधुनिक तकनीकी दक्षताओं के साथ व्यावहारिक और हाथों से किए जाने वाले कौशल भी जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भी कौशल छोटा या बड़ा नहीं होता, युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार उसमें दक्षता हासिल करनी चाहिए। एआई सूचना दे सकता है, उसे संसाधित कर सकता है और मनुष्य से कहीं अधिक तेजी से बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण कर सकता है, लेकिन किस परिस्थिति में क्या निर्णय लिया जाए और कौन सा फैसला समाज, मानव कल्याण तथा पर्यावरण के हित में होगा, इसका विवेक मनुष्य के पास ही है। युवाओं को इसी विवेक के आधार पर निर्णय लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

महिलाओं के अकेले यात्रा करने या देर शाम बाहर निकलने को लेकर असुरक्षा के सवाल पर आंबेकर ने कहा कि बदलाव की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए, जहां हम खड़े हैं। विश्वविद्यालय और आसपास ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है, जहां महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें।

उन्होंने कहा कि केवल सरकार कानून बनाकर अपराध समाप्त नहीं कर सकती। अपराध करने वाला व्यक्ति अपराध के समय कानून के बारे में नहीं सोचता। इसलिए परिवार और समाज में सुरक्षा, सम्मान और अच्छे व्यवहार को लेकर लगातार संवाद जरूरी है। बच्चों के साथ बचपन से ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जिसमें वे अपनी बात खुलकर रख सकें। परिवार में आपसी संवाद और अच्छे संबंध सामाजिक सुरक्षा की मजबूत नींव बन सकते हैं।

छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के विद्यार्थियों को बड़े संस्थानों के छात्रों के बराबर अवसर मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने ज्ञान और शिक्षा तक पहुंच को काफी आसान बनाया है। ऑनलाइन पुस्तकालय, शोध पत्रिकाएं, किताबें और अनुवाद के साधन विद्यार्थियों के लिए व्यापक संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने युवाओं से बड़े शहर या अंग्रेजी माध्यम को सफलता की अनिवार्य शर्त मानने वाली सोच बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी एक-दूसरे की मदद करें और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें। शिक्षा और रोजगार क्षमता बढ़ाने में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर आंबेकर ने कहा कि विभिन्न संगठनों के माध्यम से शिक्षा, सेवा और रोजगार से जुड़े कई प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। एकल विद्यालय जैसे प्रयासों के जरिए उन क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां स्कूलों की उपलब्धता कम है। युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, उद्यमिता और उद्योगों से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है।

आंबेकर ने कहा कि भारत आज प्रगति की ओर तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भारत को नए नजरिए से देख रही है। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे देश को अधिक समृद्ध, सशक्त और स्वाभिमानी बनाने में अपना योगदान दें।

संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन की नींव देशभक्ति और देश की स्वाधीनता के मूल उद्देश्यों पर रखी गई थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों को अपने अतीत के कुछ कार्यों के लिए आज भी माफी मांगनी पड़ती है, जबकि भारत के पूर्वजों ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके लिए दुनिया के किसी कोने में जाकर माफी मांगनी पड़े।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में केवल आदेश देने की संस्कृति नहीं होनी चाहिए। छात्रों के साथ चर्चा, सहमति और उनकी सहभागिता को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े निर्णयों में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी