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भारत-कोरिया संबंधों को नई गति, राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का पहली यात्रा पर गर्मजोशी से स्वागत

 

नई द‍िल्‍ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की पहली भारत की राजकीय यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, ''भारत की राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पधारे, कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का हार्दिक स्वागत है। राष्ट्रपति ली की भारत की यह पहली यात्रा है। राष्ट्रपति ली का स्वागत कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री, हर्ष मल्होत्रा ​​ने किया। यह यात्रा भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।''

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग दो देशों के दौरे पर हैं। म्युंग भारत के बाद शिखर वार्ता के लिए वियतनाम भी जाएंगे। द‍िल्‍ली आगमन के पश्‍चात दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने रविवार शाम को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से शिष्टाचार भेंट की। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करेंगे।

योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, पिछले साल जी7 और जी20 शिखर सम्मेलनों के दौरान हुई बातचीत के बाद यह उनकी तीसरी आमने-सामने की बैठक होगी।

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (केआईईपी) में भारत और दक्षिण एशिया टीम के प्रमुख क्यूंगहून किम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "समिट से पहले कनेक्शन बनाने, विचारों को एक जैसा करने और आखिर में एजेंडा बनाने के लिए लगातार बातचीत जरूरी है। आइए देखें कि पिछले 10 महीनों में कोरियाई और भारतीय अधिकारी ठीक यही कैसे कर रहे हैं। कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 (जून 2025) और जी20 (नवंबर 2025) के मौके पर मिले।"

उन्होंने कहा, "दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पिछले आठ महीनों में दिल्ली, कुआलालंपुर और यवेलिन्स में अपने व्यस्त शेड्यूल के दौरान तीन बार मिले। कोरिया के विदेश मंत्री, जो भारत में पहले राजदूत रह चुके हैं, से उम्मीद है कि वे संबंधों को फिर से मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।"

राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए, दोनों देशों के बीच शिपबिल्डिंग और मैरीटाइम इंडस्ट्रीज, फाइनेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), और रक्षा जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच, दोनों देश एनर्जी सप्लाई चेन पर मिलकर काम करने को तत्पर हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम